
25 लाख की ब्लैकमेलिंग का आरोप: मेडिकल माफिया नवीन द्विवेदी और मीडियाकर्मी के खिलाफ आजाक थाना में शिकायत…
अंबिकापुर (सरगुजा): शहर के चोपड़ापारा स्थित डीएचटी केयर हॉस्पिटल के प्रबंधकों ने थाना प्रभारी आ०जा०क० अंबिकापुर को एक लिखित आवेदन सौंपकर तीन व्यक्तियों पर साजिश रचने, रंगदारी मांगने, जातिगत प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। अस्पताल के प्रबंधक एस.एल. टोप्पो और डॉ. दीपिका टोप्पो की ओर से दर्ज शिकायत के अनुसार अनावेदक सुशील कुमार राय, गायत्री डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक नवीन द्विवेदी और विस्तार न्यूज चैनल के रिपोर्टर दिलीप जायसवाल एक राय होकर अस्पताल व उनके परिवार के खिलाफ भ्रामक दुष्प्रचार कर रहे हैं।
अनुबंध से शुरू हुआ विवाद और अस्पताल परिसर में अभद्रता
शिकायत के मुताबिक 30 जनवरी 2025 को सुशील कुमार राय को अस्पताल में दवा विक्रय हेतु लिखित अनुबंध के तहत अनुमति दी गई थी। भरोसा करके उसे आयुष्मान भारत योजना का पोर्टल आईडी, पासवर्ड तथा अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपी गईं, लेकिन उसने जल्द ही अस्पताल को आर्थिक क्षति पहुंचाना शुरू कर दिया। जब प्रबंधन ने उसे चेतावनी दी, तो उसने जातिगत लांछन लगाने शुरू कर दिए। आरोप है कि 03 जुलाई 2026 की शाम सुशील राय ने डॉ. दीपिका टोप्पो से उनके आदिवासी होने को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं और उनका मोबाइल छीनकर पटक दिया। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी डॉ. अशोक कुमार टोप्पो और सह-प्रबंधक जमुना प्रसाद थे।
25 लाख की रंगदारी, ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी का आरोप
इस घटना के बाद सुशील कुमार राय ने अपने साथियों नवीन द्विवेदी और दिलीप जायसवाल के साथ मिलकर सोशल मीडिया व न्यूज चैनलों पर अस्पताल की छवि खराब करने के उद्देश्य से भ्रामक प्रचार शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन का गंभीर आरोप है कि तीनों अनावेदक मिलकर अस्पताल चलाने के बदले प्रतिमाह मोटी रकम या फिर 20 से 25 लाख रुपये की एकमुश्त मांग कर रहे हैं। रकम न देने पर झूठे दस्तावेजों के जरिए पूरे परिवार को जेल भिजवाने, अस्पताल बंद कराने और राजनीतिक व प्रशासनिक पहुंच का हवाला देकर परिजनों को खेती-बाड़ी करने जैसी धमकियां दी जा रही हैं।
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की गुहार
शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका परिवार अनुसूचित जनजाति वर्ग से आता है और वे पिछले दो वर्षों से क्षेत्र के गरीब मरीजों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। सामान्य वर्ग के अनावेदक उनकी सफलता से जलकर उन्हें केवल आदिवासी होने के कारण प्रताड़ित कर रहे हैं और अवैध वसूली पर उतारू हैं। पीड़ित परिवार ने अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए थाना प्रभारी से अनावेदकों के विरुद्ध उचित कानूनी धाराओं के तहत जल्द से जल्द अपराध दर्ज करने की मांग की है।



