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कोटेश्वर तीर्थ कोटड़ा में माँ नर्मदा घाट निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, 10 दिन में दिखा ऐतिहासिक बदलाव

पाइपलाइन शिफ्टिंग कार्य पूर्ण... अब जल्द शुरू होगा पक्की सीढ़ियों का निर्माण...




रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977697

मनावर (धार)। माँ नर्मदा की असीम कृपा, संतों के आशीर्वाद और जनसहयोग से कोटेश्वर तीर्थ कोटड़ा स्थित माँ नर्मदा घाट निर्माण कार्य अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। मात्र 10 दिन पूर्व हरियाली अमावस्या (14 जुलाई) के पावन अवसर पर परम पूज्य पंडित प्रवीण जी शर्मा (राधे भैया) एवं अक्षराधिपति भगवान स्वामीनारायण के परम पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में भूमि पूजन संपन्न हुआ था। इसके बाद से निर्माण स्थल पर लगातार युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।
निर्माण स्थल पर वर्तमान में 5 पोकलेन, 5 जेसीबी, 10 डंपर तथा अनेक ट्रैक्टर दिन-रात सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। भराव, समतलीकरण और आधार निर्माण का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है।

घाट निर्माण की सबसे बड़ी उपलब्धि 9 पाइप लाइनों का सफलतापूर्वक शिफ्टिंग कार्य पूरा होना माना जा रहा है। इससे क्षेत्र के किसानों को हर वर्ष डूब के समय मोटर पंप, पाइपलाइन और विद्युत व्यवस्था हटाने की परेशानी से स्थायी राहत मिलेगी। समिति के अनुसार यह परियोजना केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि किसानों के हित में भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

निर्माण कार्य की तेज गति को देखते हुए समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले पक्की सीमेंट-कंक्रीट की सीढ़ियों का निर्माण अगले वर्ष प्रस्तावित था, लेकिन अब दो से तीन दिनों के भीतर ही इसका कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इससे इस वर्ष ही श्रद्धालु सुरक्षित रूप से माँ नर्मदा में स्नान, पूजन एवं दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

इसी क्रम में श्री हरिहर घाट, वराह नगर बड़दा की टीम भी निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुँची। अल्प समय में हुए व्यापक कार्य को देखकर टीम के सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे जनसहयोग, श्रद्धा और समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

समिति ने माँ नर्मदा के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि जिन्होंने भूमि पूजन के अवसर पर दान की घोषणा की थी, वे अपनी घोषित राशि शीघ्र जमा कराएं, ताकि निर्माण कार्य और अधिक गति से पूरा किया जा सके। साथ ही जो श्रद्धालु इस पुण्य कार्य में सहयोग करना चाहते हैं, वे समिति से संपर्क कर या व्हाट्सएप के माध्यम से भी अपनी दान राशि की घोषणा कर सकते हैं।

समिति का कहना है कि मंदिर, घाट और धर्मस्थलों के निर्माण में दिया गया सहयोग समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बनता है। इसी उद्देश्य के साथ सभी श्रद्धालुओं से माँ नर्मदा की सेवा में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।

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