जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर सवाल, संवाद से निकलना चाहिए था समाधान: एडवोकेट एम. जिया मलिक

देखिए रामपुर से जिला संवाददाता मनदीप कम्बोज की विशेष रिपोर्ट
रामपुर। भारतीय किसान यूनियन (मनीष) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट एम. जिया मलिक ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्वक रखने वाले निहत्थे छात्रों पर बल प्रयोग करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।
मीडिया को जारी बयान में एडवोकेट एम. जिया मलिक ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए चुना गया शासन है, इसलिए जनता को अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल पूछने और अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे छात्र-छात्राएं देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। सरकार को चाहिए था कि वह छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा देकर धरना समाप्त कराती। इसके विपरीत लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं कही जा सकती।
एडवोकेट एम. जिया मलिक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती संवाद, संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से होती है, न कि बल प्रयोग से। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचते हुए सरकार को बातचीत के माध्यम से जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

