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हमीरपुर :जर्जर भवन में चल रहा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव

मौदहा (हमीरपुर)। मौदहा तहसील क्षेत्र के नरायच गांव में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। जर्जर भवन में चल रहे अस्पताल की दीवारों और छत पर दरारें…

हमीरपुर :जर्जर भवन में चल रहा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
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मौदहा (हमीरपुर)। मौदहा तहसील क्षेत्र के नरायच गांव में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय इन दिनों बदहाली का शिकार है।

जर्जर भवन में चल रहे अस्पताल की दीवारों और छत पर दरारें पड़ी हुई हैं। अस्पताल में मरीजों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संचालित अस्पताल खुद ही बदहाल स्थिति में है। अस्पताल में न तो चपरासी की तैनाती है और न ही किसी सहयोगी चिकित्सक की व्यवस्था है।

अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. कमलेश बाबू ने बताया कि जब उन्होंने यहां कार्यभार संभाला था, उस समय छत से बुरी तरह पानी टपकता था और बैठने के लिए भी उचित स्थान नहीं था।

अस्पताल में बिजली और पंखे की व्यवस्था भी नहीं थी। चिकित्सक के मुताबिक उन्होंने अपने निजी खर्च से लाइट और पंखे लगवाए तथा छत व दीवारों की मरम्मत भी कराई।

वहीं, ग्रामीणों ने अस्पताल के नियमित संचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल सप्ताह में केवल दो से तीन दिन ही खुलता है।

मामले की हकीकत जानने के लिए अखंड भारत न्यूज़ चैनल की टीम नरायच स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय पहुंची और वहां तैनात चिकित्सक से संपर्क किया। इस संबंध में डॉ.

कमलेश बाबू ने बताया कि नरायच में उनकी ड्यूटी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को रहती है, जबकि मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को उनकी ड्यूटी अरतरा में रहती है। चिकित्सक की ओर से स्पष्ट किया गया कि निर्धारित रोस्टर के अनुसार ही दोनों स्थानों पर सेवाएं दी जाती हैं।

ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से जर्जर भवन की मरम्मत कराने, अस्पताल में बिजली, पंखे, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा कर्मचारियों की तैनाती की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधा का समुचित लाभ मिल सके।