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हमीरपुर :गंगा गायत्री की पैमाईश सवालों के घेरे में, शिकायत कर्ता ने जताई आपत्ति

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट

सुमेरपुर हमीरपुर । गायत्री गंगा नदी पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई के तहत गुरुवार को राजस्व विभाग की टीम ने नदी की पैमाइश कर सीमांकन (चिन्हीकरण) किया। सीमांकन के बाद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि शिकायतकर्ता ने पैमाइश पर असंतोष जताते हुए इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।कस्बे के समाजसेवी राजेश शिवहरे ने गायत्री गंगा नदी पर अतिक्रमण की शिकायत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में की थी। इस पर एनजीटी ने संबंधित विभागों से कार्रवाई का ब्योरा और साक्ष्य तलब किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को प्रस्तावित है।एनजीटी की सुनवाई को देखते हुए जिला प्रशासन ने नदी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने एडीएम न्यायिक रिजवाना शाहिद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जिसमें एसडीएम सदर, बीडीओ सुमेरपुर और अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत सुमेरपुर दिनेश चंद्र आर्य सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं।गुरुवार को ईओ दिनेश चंद्र आर्य की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने तपोभूमि के निकट हाईवे पुल से नदी की पैमाइश शुरू की। भूलेख निरीक्षक विनोद निगम व भूपत सोनी तथा लेखपाल महेंद्र कुमार, अशोक कुमार, डॉ. प्रदत्त, कमलेश कुमार और पूजा गुप्ता ने सीमांकन करते हुए सीमा-चिह्न (पत्थर) स्थापित किए। अधिकारियों के अनुसार इस स्थान पर नदी की चौड़ाई 20 मीटर दर्ज की गई।वहीं शिकायतकर्ता राजेश शिवहरे ने इस पैमाइश पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि अंग्रेजों के शासनकाल में बने रेलवे पुल की चौड़ाई लगभग 60 मीटर है, जबकि वर्तमान में कई स्थानों पर नदी की चौड़ाई केवल 20 मीटर मानकर पैमाइश की जा रही है। उन्होंने बताया कि वह शुक्रवार को जिलाधिकारी से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।गौरतलब है कि पैमाइश के दौरान गठित समिति के सदस्यों में केवल ईओ सुमेरपुर ही मौके पर उपस्थित रहे।

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