
ए परवर दिगार हमें हुसैन का ऐसा रिस्क अता करना कि उसके बाद किसी तरह तंगी नहीं आए..जनाब केज़ार भाई साहब
इमाम हुसैन (अ.स) की याद में मरसिया, वआज़…
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। ए दोस्तों, ए भाइयों, मेरे साथ हुसैन पर आंसू बहा लो, अशरा मुबारक की इंतजारी 1 साल से थी। हर जानिब से या हुसैन या हुसैन की आवाज आ रही है या हुसैन का नाम ऐसा नाम है कि नाउम्मीद उम्मीद में बदल जाएगी।आज आशूरा का दिन है हुसैन पर बहुत मातम करना उक्त उद्गार मोहर्रम की 10 तारीख को मुंबई से आये उस्ताद केज़ार भाई साहब ने बोहरा समाज की बोहरा बाखल स्थित जमाली मस्जिद में मोहर्रम की आशूरा के दिन वाअज़ के दौरान व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी उम्मीद यह है कि उम्र की आखरी सांस तक इमाम हुसैन का मातम करते रहें। ए अल्लाह हमें हुसैन का ऐसा रिस्क अता करना कि उसके बाद किसी तरह की तंगी नहीं आए। हुसैन पर हमारी आंख आंसुओं की बारिश की तरह बरसता रहे अल्लाह तुम्हें इमाम हुसैन का मातम में बहुत बरकत अता करें। 51वे धर्मगुरु सैय्यदना ताहेर सैफुद्दीन मौला और 52 में धर्मगुरु सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन मौला का जितना शुक्र करें हम उतना कम है। दोनों मौला की दुआओं से दुनिया में सभी बोहरा समाजजन फला और खुला है
इस्तग्फार मांगने से खुदा खुश होता हैं…
मगरिब की नमाज के पूर्व रतलाम से आए मुल्ला हुसैन भाई ने बताया कि माफी मांगते रहना खुदा की रहमत हासिल होती हैं और हर एक दिन और दुनिया की नाउम्मीद उम्मीद में बदल जाती है मुश्किल से मुश्किल हालात में नाउम्मीद नहीं होना चाहिए दुनिया में इंसान अलग-अलग चीजों से नाउम्मीद होता है या उसके दुरुस्त होने की उम्मीद कम रहती है। जिससे तनाव बढ़ जाता है या इंसान कभी कभी आत्महत्या की भी सोचने लगता है। दुनिया में किसी भी चीज से ना उम्मीद नहीं होना चाहिए। अली मुश्किल कुशा की उम्मीद को दूर करने का इलाज बताते हैं कि इस्तगफार करना चाहिए। इंसान को किस्म किस्म की उम्मीद रहती है, लेकिन ना उम्मीद होने की वजह गुनाह है। माफी करने से गुनाह दूर होता जाता है और नाउम्मीद को उम्मीद में बदल जाता है। रहमत हालात को बदल देती है
इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत सुनकर नम हुई आँखे..
बोहरा समाज द्वारा धार्मिक मोहर्रम पर्व की 10 तारीख को केज़ार भाई साहेब के द्वारा इमाम हुसैन (अ.स.) के एवं आपके अहलेबैत ओर असहाब की शहादत की वआज़ पुरजोश अंदाज़ में किया गया। वआज़ सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक हुई। इसके बाद स्थानीय गणेश चौपाटी पर बोहरा समाज द्वारा इमाम हुसैन के गम मे अलम निकालकर बोहरा बाखल स्थित जमाली मस्जिद पहुंचकर पुनः वआज़ शुरू की गई। आशूरा के दिन स्थानीय गणेश चौपाटी से समाजजन नगर की मरसिया पार्टी के साथ इमाम हुसैन (अ.स) की याद में मरसिया पड़ कर मातम करते चल रहे थे। नगर की मस्जिद में पुनः वआज़ शुरू हुआ, जो मगरिब की नमाज़ तक चला।
इस अवसर पर जनाब केज़ार भाई साहब ने बताया कि आज आशूरा के दिन कर्बला में इमाम हुसैन (अ.स.) पर जो मुसीबत गुज़री उसकी हम इन दिनों में इमाम हुसेन पर जो 1400 वर्ष पहले कर्बला (इराक) में जो जुल्मो सितम हुए तीन दिन की भूख व प्यास में ही इमाम हुसैन (अ.स.) व ऐहलेबेत की शहादत हुई। हम हुसैन की मुसीबत को याद कर आंसू बहाकर गम करते है। हुसैन (अ.स.) ने इंसानियत का पैगाम दिया था। आशूरा के दिन मोहर्रम पर बयान करते हुए कहां की हुसैन पर सात तारीख से पानी बंद किया गया । तीन दिन के हुसैन के साथ 72 एहलेबेत भी भूखे, प्यासे थे। वआज़ के अंत में हुसैन की शहादत पढ़ी तो समाजजनो ने पुरजोश मातम किया तो समाजजनों की आंखो से अविरल आंसू बह निकले और मस्जिद या हुसैन या हुसैन के मातम से गुंज उठी।
