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हलछट पर किया महिलाओं ने भगवान बलराम का पूजन

संतान की लंबी आयु की कामना और आरोग्य के लिए किया जाता है व्रत

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

 मनावर। जिला धार।। भादव माह की छठ तिथि को हलछट (हलषष्ठी) पर्व 29 अगस्त शुक्रवार को महिलाओं द्वारा भक्तिभाव से मनाया गया। इस दिन संतान की लंबी आयु की कामना से यह व्रत किया जाता है, जिसमें सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर की दीवार पर हल, पशु और किसान के चित्र बनाकर पूजन की जाती है और चौकी पर गणेश, पार्वती की स्थापना कर उनकी पूजा होती है। इस व्रत में बिना हल से जुते हुए अन्न का सेवन होता है, जो कि तालाब में पैदा हुए या महुआ के पत्तों पर आधारित होता है, और बछड़े वाली भैंस का दूध व इसी दूध से निर्मित दही, मिष्ठान्न, घी का ही इस्तेमाल किया जाता है। महिलाओ ने मंदिरों में एकत्र होकर पूजन कीर्तन किया। तथा हालछठ की कथा सुनी।

हरछठ व्रत पूजा विधि:
सूर्योदय से पहले उठकर महिलाएं स्नान करती है। घर की दीवार पर गोबर से छठ माता, हल, पशु और किसान का चित्र बनाकर पूजा की जाती है। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर, चौकी पर कलश रखकर भगवान गणेश और माता पार्वती जी की पूजा की जाती है। मिट्टी के कुल्हड़ में ज्वार और महुआ के फल भरकर और एक मटकी में देवली-छेवली रखकर भी पूजन करने का विधान है।

हलषष्ठी माता को हल्दी से रंगे आभूषण और वस्त्र अर्पित करते है। सात तरह के अनाज (जैसे गेहूं, मक्का, जौ, अरहर, मूंग, धान), भुने हुए चने का भोग लगाकर बछड़े वाली भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन किया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं महुआ के पत्ते पर महुआ का फल और बछड़े वाली भैंस के दूध से बनी दही का सेवन करती हैं। इस व्रत में तालाब में पैदा हुई चीजें और महुआ के पत्ते आदि खाए जाते हैं। व्रत में बिना हल से जुटाई किए हुए खेतों में उगने वाले धान के चावल को ग्रहण किया जाता है।

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