*बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार के प्रकरण में सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पर 5 माह के बाद भी नहीं हो सकी जांच कार्यवाही*
*जिलाधिकारी कार्यालय को पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रेषित था सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पत्र*
*शिकायत की जांच एवं कार्यवाही के सम्बन्ध में जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत का भी किया गया गलत अन्तरण एवं अधूरा निस्तारण फीड बैक के बाद भी नहीं हो सका पूर्ण निस्तारण*
*प्रशासनिक व्यवस्था एवं क्रियाकलापों पर उठे सवाल त्वरित जांच एवं कार्यवाही की मांग*
*अम्बेडकर नगर*
*(जिलाधिकारी कार्यालय)*
सरकार द्वारा भले ही ज़ीरो टालरेन्स की नीति को असली जामा पहनाकर धरातल पर इसके होने वाले असर की भिन्न-भिन्न माध्यमों से लगातार समीक्षा की जा रही है लेकिन मानो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन तन्त्र द्वारा इसे धरातल पर उतरने ही नहीं दिया जा रहा है। शिकायत कर्ता का आरोप हैं कि उसने मत्स्य विभाग अम्बेडकर नगर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों के चयन, अनुदान आवंटन एवं योजना के धरातलीय क्रियान्वयन में हुए बड़े पैमाने पर शासकीय धनराशि के बन्दरबाट के जांच के सम्बन्ध में पंजीकृत डाक के माध्यम से समस्त साक्ष्यों सहित सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पत्र दिनांकित 12.06.2026 जिलाधिकारी महोदया के कार्यालय को प्रेषित किया गया था जो कार्यालय जिलाधिकारी अम्बेडकर नगर को दिनांक 15.06.2026 को प्राप्त भी हों गया लेकिन अद्यतन लगभग 5 माह का समय बीत जाने के बाद भी ना ही प्रकरण की जांच हो सकी और ना ही कोई कार्यवाही ही और ना ही शिकायत को जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड ही किया गया कि जिससे शिकायत कर्ता शिकायत पर संपादित अग्रिम कार्यवाही की जानकारी प्राप्त कर सके। शिकायत कर्ता द्वारा अपने पूर्व प्रेषित सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पत्र पर संपादित किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही से अनभिज्ञ होने की दशा में जब जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत सन्दर्भ संख्या 40017826025356 दिनांकित 04.07.2026 के माध्यम से जिलाधिकारी कार्यालय को शिकायत किया गया तों कार्यालय द्वारा बिना शिकायत का अवलोकन किये ही उसे सहायक निदेशक मत्स्य के पटल पर अग्रेषित कर दिया गया जो की औचित्य विहीन था क्योंकि शिकायत कर्ता द्वारा अपनी शिकायत सशपथ जिलाधिकारी कार्यालय को जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया था और जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा ही शिकायत को जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड कर प्रकरण की जांच के सम्बन्ध में जांच अधिकारी नामित कर जाच समिति का गठन किया जाना था।
*शिकायत कर्ता द्वारा प्रेषित सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पत्र एवं जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत के निस्तारण एवं निस्तारण आख्या पर दिये गये असंतुष्टि फीडबैक के बाद हुएं निस्तारण पर उठे सवाल*
शिकायत कर्ता द्वारा पंजीकृत डाक के माध्यम से जिलाधिकारी कार्यालय को प्रेषित एवं कार्यालय को प्राप्त सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पत्र को ना ही जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड ही किया गया और ना ही प्रकरण में प्रचलित अग्रिम कार्यवाही की जानकारी ही शिकायत कर्ता को दी गई और जब शिकायत कर्ता द्वारा अपने पूर्व प्रेषित सशपथ शिक़ायती प्रार्थना पत्र पर संपादित अग्रिम कार्यवाही की जानकारी की अपेक्षा के साथ जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत सन्दर्भ संख्या 40017826025356 दिनांकित 04.07.2026 के माध्यम से जिलाधिकारी कार्यालय को शिकायत प्रेषित किया गया तो शिकायत के निस्तारण में जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा पोर्टल पर प्रकरण में प्रचलित अग्रिम कार्यवाही के सम्बन्ध में साक्ष्य अपलोड करने के बजाय औचित्य विहीन रूप में शिकायत को सहायक निदेशक मत्स्य के पटल पर आन्तरित कर अपनी जवाबदेही से पीछा छुड़ाना उचित समझा गया और सहायक निदेशक मत्स्य द्वारा भी बिना किसी आख्या के मात्र पोर्टल पर यह लिखकर कि जांच प्रक्रियाधीन है रिपोर्ट आने पर अग्रिम कार्यवाही की जायेगी का हवाला देकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।उक्त शिकायत निस्तारण आख्या से असंतुष्ट शिकायत कर्ता द्वारा जब असंतुष्टि का फीडबैक दर्ज किया गया तों फीडबैक के निस्तारण में सक्षम लोक सेवक द्वारा पोर्टल पर यह लिखकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया कि जनपदीय अधिकारी की आख्या से सहमति के आधार पर शिकायत निस्तारित किया जाता है।यानि सम्बन्धित सक्षम लोक सेवकों द्वारा ना ही शिकायत कर्ता को उसकी शिकायत पर संपादित किसी अग्रिम कार्यवाही की जानकारी ही दी गई और ना ही जनसुनवाई पोर्टल पर कृत शिकायत का पूर्ण एवं पारदर्शिता पूर्ण निष्पक्ष निस्तारण ही किया गया।अब देखना यह होगा कि क्या अपने कार्यों, दायित्वों के निर्वहन,लगन एवं कडी मेहनत के लिए नारी सशक्तिकरण की मिशाल जनता की विश्वासपात्र जिलाधिकारी महोदया अम्बेडकर नगर श्रीमती ईशा प्रिया जी द्वारा प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए अपने कार्यालय एवं कार्यालय के सम्बन्धित जिम्मेदार कर्मचारियों को अपनी एवं कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार करवाने सहित सम्बन्धित प्रकरण की पारदर्शिता पूर्ण निष्पक्ष त्वरित जांच एवं कार्यवाही के निमित्त कोई ठोस कदम उठाती है या फिर बड़े पैमाने पर हुएं शासकीय धनराशि के दुरूपयोग एवं बन्दरबाट से सम्बन्धित यह शिकायत भी कार्यालय की फाइलों में बिना किसी जांच कार्यवाही के दफन कर दिया जाता है।
