आलीराजपुर :- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खड़वेला के आलीराजपुर दौरे के दौरान आयोजित सेवा संकल्प कार्यक्रम में कथित तौर पर स्कूली आदिवासी बच्चों को ट्रकों में भरकर लाए जाने तथा ग्राम डोबलाझिरी स्थित बॉयज हॉस्टल में बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन दिए जाने की शिकायतों को लेकर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने वीडियो जारी कर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पोषण सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन इन मामलों से व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महेश पटेल ने कहा कि सेवा संकल्प का अर्थ जनता की सेवा करना है, न कि राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ दिखाने के लिए स्कूली बच्चों को लाना। आदिवासी समाज के बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर अपना भविष्य बनाने के लिए जाते हैं। उनके माता-पिता उम्मीद करते हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलेगा। ऐसे में यदि बच्चों को पढ़ाई के समय राजनीतिक कार्यक्रमों में ले जाया जाता है, तो उनकी शिक्षा और सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने सवाल किया कि बच्चों को कार्यक्रम में ले जाने से पहले क्या उनके माता-पिता या अभिभावकों से अनुमति ली गई थी? क्या अभिभावकों को इसकी जानकारी दी गई थी? बच्चों को स्कूल से बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी और उनके सुरक्षित परिवहन के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? यदि बच्चों को ट्रकों में भरकर ले जाया गया, तो क्या उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? उन्होंने मांग की कि इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए।
महेश पटेल ने कहा कि भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या अब राजनीतिक कार्यक्रमों की सफलता स्कूली बच्चों की भीड़ से मापी जाएगी? यदि कार्यक्रमों को लेकर जनता में पर्याप्त उत्साह है, तो फिर स्कूली बच्चों को लाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? बच्चों का भविष्य किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्हें राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बनाने के बजाय बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
डोबलाझिरी बॉयज हॉस्टल में गुणवत्ताहीन भोजन का मामला भी उठाया
महेश पटेल ने ग्राम डोबलाझिरी स्थित बॉयज हॉस्टल में बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन दिए जाने की शिकायत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी डोबलाझिरी बॉयज हॉस्टल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। अब छात्रावास में बच्चों को उचित भोजन नहीं मिलने की शिकायत सामने आने से व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “जब मंत्री अपने ही गृह ग्राम में स्थित छात्रावास के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं, तो वे जिले और प्रदेश का क्या भला करेंगे?” उन्होंने कहा कि छात्रावास में रहने वाले बच्चे अपने घर-परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं। उनके स्वास्थ्य, पोषण और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की है।
महेश पटेल ने कहा कि बच्चों को गुणवत्ताहीन भोजन देना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। छात्रावास में बच्चों को नियमित रूप से पर्याप्त, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए। प्रशासन को छात्रावास का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू के पालन और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की जांच करनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों के विकास की बात केवल भाषणों और सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बच्चों को अच्छी शिक्षा, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। एक ओर स्कूली बच्चों को राजनीतिक कार्यक्रम में लाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। प्रशासन को दोनों मामलों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग
महेश पटेल ने मांग की कि सेवा संकल्प कार्यक्रम में बच्चों को लाए जाने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। बच्चों को स्कूल से बाहर ले जाने की अनुमति, अभिभावकों की सहमति, स्कूल प्रबंधन की भूमिका और परिवहन के दौरान सुरक्षा के इंतजामों की जानकारी स्पष्ट की जाए। साथ ही डोबलाझिरी बॉयज हॉस्टल में भोजन व्यवस्था की जांच कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों का भविष्य किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम से अधिक महत्वपूर्ण है। बच्चों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजा जाता है, राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ बढ़ाने के लिए नहीं। इसी तरह छात्रावास में रहने वाले बच्चों को भोजन और बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
महेश पटेल ने कहा कि सेवा संकल्प का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब बच्चों को अच्छी शिक्षा, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित भविष्य मिलेगा। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आदिवासी बच्चों के अधिकारों की अनदेखी न हो। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
