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सर्वपितृ अमावस्या पर दीपदान कर पितरों को किया नमन

मान नदी के पावन तट, कुआं-बावड़ियों और घर-आंगन में जगमगाए दीप; सांझा माता का विधि-विधान से विसर्जन, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना... शनि अमावस्या पर शनि मंदिर में उमड़ेगी आस्था की…

सर्वपितृ अमावस्या पर दीपदान कर पितरों को किया नमन
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मान नदी के पावन तट, कुआं-बावड़ियों और घर-आंगन में जगमगाए दीप; सांझा माता का विधि-विधान से विसर्जन, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना… शनि अमावस्या पर शनि मंदिर में उमड़ेगी आस्था की भीड़…

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और पारिवारिक परंपराओं के निर्वहन का पर्व सर्वपितृ अमावस्या शनिवार को मनावर में धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन लोगों ने अपने पूर्वजों के निमित्त दीप प्रज्वलित कर उन्हें नमन किया और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य तथा खुशहाली की कामना की। सूर्यास्त के बाद गोधूलि बेला में नगर के घरों, आंगनों और विभिन्न धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों पर दीपों की रोशनी दिखाई दी।

नगरवासियों ने अपने घरों के मुख्य द्वार, आंगन, तुलसी के समीप, वटवृक्ष, पीपल और त्रिवेणी स्थलों पर दीप प्रज्वलित किए। मान नदी के पावन तट के साथ कुआं, बावड़ी और अन्य जल स्रोतों पर भी श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पूर्वजों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त होती है। इसी भावना के साथ परिवारों ने अपने पूर्वजों के निमित्त दीप अर्पित किए।

*16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष की परंपरा का हुआ समापन*

श्राद्ध पक्ष के दौरान घरों में स्थापित की गई सांझा माता का भी सर्वपितृ अमावस्या पर विधि-विधान से विसर्जन किया गया। श्राद्ध पक्ष में कई परिवारों में सांझा माता की पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जाती है। महिलाएं और युवतियां प्रतिदिन सांझा माता की पूजा कर लोकगीतों के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करती हैं। अमावस्या पर विसर्जन के साथ इस पारंपरिक धार्मिक आयोजन का समापन हुआ।

*सर्वपितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व*

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या कहा जाता है। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है। धार्मिक मान्यता है कि जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो, अथवा जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर किसी कारणवश नहीं हो पाया हो, उनके निमित्त इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है। इसी कारण इस अमावस्या को पितरों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।

परंपरानुसार इस दिन स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। जरूरतमंदों को भोजन कराना, अन्नदान करना तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना भी पुण्यकारी माना गया है। शाम के समय दीपदान कर पूर्वजों का स्मरण करने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।

*पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का संदेश*

सर्वपितृ अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के योगदान को याद करने और परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाने का भी दिन है। मनावर में घरों से लेकर नदी तट और पारंपरिक जल स्रोतों तक दीप प्रज्वलित कर लोगों ने श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण किया। दीपों की रोशनी के बीच श्राद्ध पक्ष का समापन हुआ और लोगों ने अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं स्वस्थ जीवन की मंगलकामना की।

*शनि अमावस्या पर शनि मंदिर में लगी आस्था की भीड़*

शनि अमावस्या होने के कारण धार रोड़ स्थित बाल सिद्ध हनुमान शनि मंदिर, खेड़ापति हनुमान शनि मंदिर, समीपस्थ शनि मंदिर वायल में दर्शनार्थियों का दिनभर तांता लगा रहा। धर्मालुजनों ने भारी संख्या में शनि मंदिर पहुंच कर पूजा अर्चना की।