मौदहा, हमीरपुर। कस्बा स्थित गांधी विद्यालय में रविवार को संत निरंकारी मिशन द्वारा आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में मौदहा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने सहभागिता की। इस आध्यात्मिक सत्संग की अध्यक्षता चित्रकूट से पधारे ब्रह्मज्ञानी महात्मा देवानंद ने की।
महात्मा देवानंद ने अपने प्रवचनों में बताया कि संत निरंकारी मिशन का उद्देश्य ब्रह्मज्ञान के माध्यम से मनुष्य को निराकार परमात्मा का बोध कराना तथा उसके जीवन में प्रेम, शांति, सद्भाव और मानवता की भावना को विकसित करना है। सत्गुरु की कृपा से प्राप्त ब्रह्मज्ञान मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
महात्मा ने आगे बताया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि परमात्मा को जानकर उसके प्रति समर्पण भाव से जीवन जीना है। जब मनुष्य निराकार प्रभु को जान लेता है, तो उसके मन से भेदभाव, नफरत और अहंकार जैसी भावनाएं दूर होने लगती हैं। वह प्रत्येक मनुष्य के प्रति प्रेम, सम्मान और समानता का भाव रखता है। उन्होंने सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत निरंकारी मिशन में सेवा, सत्संग और सुमिरन को आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। निःस्वार्थ सेवा का वास्तविक भाव तभी प्रकट होता है, जब मनुष्य बिना किसी स्वार्थ या भेदभाव के दूसरों की सहायता करता है। मानवता की सेवा करना ही आध्यात्मिक विचारों को अपने जीवन में उतारने का सार्थक माध्यम है।
अंत में मौदहा के मुखी रामबहादुर ने सत्संग में पधारे सभी श्रद्धालुओं की सहभागिता के लिए धन्यवाद देते हुए सत्संग के माध्यम से प्राप्त आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
