
दीपक शर्मा की रिपोर्ट
भाजपा सरकार में मंत्री की ही सुनवाई नहीं हो रही तो आम जनता की कौन सुनेगा? नागर सिंह चौहान को अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना-ज्ञापन क्यों देना पड़ रहा? — महेश पटेल खनिज नीलामी से प्रभावित गांवों की जमीन के मुद्दे पर जोबट विधायक सेना महेश पटेल और महेश पटेल ने ग्रामीणों से की रायशुमारी, विधानसभा से सड़क तक संघर्ष का ऐलान ।
जोबट/चंद्रशेखर आजाद नगर।
खनिज नीलामी से प्रभावित आदिवासी गांवों की जमीन, जल-जंगल-जमीन और किसानों के अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने अपना आंदोलन तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में आज जोबट विधायक सेना महेश पटेल एवं आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व में जोबट एवं उदयगढ़ ब्लॉक के प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों के साथ जोबट विधायक कार्यालय में बैठक कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद नगर के डाक बंगले में भी प्रभावित ग्रामीणों के साथ चर्चा एवं रायशुमारी की गई।बैठक में ग्रामीणों ने खनिज नीलामी और जमीन से जुड़े अपने पक्ष को नेताओं के सामने रखा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि आदिवासी किसानों की जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
“नागर सिंह चौहान की अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं हो रही?”
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं और नागर सिंह चौहान स्वयं कैबिनेट मंत्री हैं, तो फिर उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना और ज्ञापन देने की जरूरत क्यों पड़ रही है? उन्होंने कहा कि मंत्री कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना दे रहे हैं और अपनी ही सरकार से मांग कर रहे हैं। “अगर एक कैबिनेट मंत्री की बात मुख्यमंत्री और सरकार में नहीं सुनी जा रही है, तो फिर आम आदिवासी, किसान और गरीब की सुनवाई की उम्मीद कैसे की जाए? ”महेश पटेल ने कहा कि मंत्री को कलेक्टर के सामने नहीं, कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। यदि वे वास्तव में जिले को सूखाग्रस्त घोषित करवाना चाहते हैं तो कैबिनेट में प्रस्ताव रखें और मुख्यमंत्री से फैसला करवाएं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा— “सरकार आपकी, मुख्यमंत्री आपके, कैबिनेट आपकी, सांसद-जिला पंचायत,जनपद आपके और प्रशासन भी आपकी सरकार का; फिर धरना किसके खिलाफ और ज्ञापन किसको? “पहले कांग्रेस पर अफवाह फैलाने का आरोप, अब खुद भाजपा नेता धरने पर” महेश पटेल ने कहा कि कुछ समय पहले भाजपा नेता कांग्रेस पर अफवाह फैलाने और किसानों को गुमराह करने के आरोप लगा रहे थे। लेकिन अब स्थिति यह है कि भाजपा के ही मंत्री और पदाधिकारी अपनी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस इस मुद्दे को पहले से उठा रही थी तब उसे गलत बताया गया, लेकिन अब भाजपा के नेता स्वयं उसी विषय को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। “अगर कांग्रेस गलत थी तो आज भाजपा के मंत्री उसी मुद्दे को लेकर धरने पर क्यों बैठे हैं? जनता इसका जवाब चाहती है। ”छोटी खट्टली सहित अन्य ग्रामों की प्रक्रिया वर्षों से चल रही, किसानों को जानकारी कब मिली? ”महेश पटेल ने कहा कि छोटी खट्टाली सहित प्रभावित क्षेत्रों में खनिज नीलामी की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। जब किसानों को अपनी जमीन प्रभावित होने की जानकारी मिली तो कांग्रेस ने इस विषय को गंभीरता से उठाया और ग्रामीणों को जागरूक किया।उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जमीन, जल-जंगल-जमीन और उनके अधिकारों से जुड़े विषय में ग्रामीणों की राय और सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।उन्होंने प्रशासन से भी स्पष्ट जवाब मांगा कि यदि मामला इतना सामान्य है तो प्रभावित पंचायतों और ग्रामीणों से अभिमत लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी? “कलेक्टर से सवाल पूछने वाले मंत्री अब मुख्यमंत्री से जवाब क्यों नहीं मांगते?”। महेश पटेल ने कहा कि 25 तारीख को बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी बात रखी। प्रशासन के समक्ष ग्रामीणों की समस्याएं रखी गईं। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री को भी यही चिंता है तो उन्हें मुख्यमंत्री के सामने खड़े होकर जवाब मांगना चाहिए। “नागर सिंह चौहान जी, आप कैबिनेट मंत्री हैं। यदि आपमें ताकत है तो कैबिनेट में प्रस्ताव रखिए, मुख्यमंत्री से कहिए कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। किसानों को रोजगार और राहत दिलाइए। कलेक्टर के सामने धरना देने से सरकार नहीं बदलती, फैसला मुख्यमंत्री और कैबिनेट को करना है।” “आदिवासी समाज एक इंच जमीन भी नहीं जाने देगा”

जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि उसकी पहचान, आजीविका और भविष्य है। उन्होंने कहा कि आदिवासी किसानों के पास पहले से ही सीमित जमीन है। ऐसे में जमीन से जुड़े किसी भी प्रकरण में पारदर्शिता और किसानों के अधिकार सर्वोच्च होने चाहिए। “हम अपने आदिवासी समाज की जमीन की लड़ाई विधानसभा में भी लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे। किसानों को डरने की जरूरत नहीं है।”
विधानसभा में उठेगा मुद्दा, आदिवासी विधायक मिलकर बनाएंगे रणनीति। सेना महेश पटेल ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में जोबट विधानसभा क्षेत्र में जमीन के स्वामित्व और खनिज नीलामी से प्रभावित क्षेत्रों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर विधानसभा में प्रश्न लगाया जाएगा। यदि ग्रामीणों की आवाज को सदन में पर्याप्त महत्व नहीं मिला तो आदिवासी विधायकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा—“यह मेरा मुख्य मुद्दा रहेगा। मैं अपने समाज को भरोसा दिलाती हूं कि उनकी जमीन और अधिकारों की आवाज विधानसभा में मजबूती से उठाऊंगी।”

महेश पटेल का भाजपा नेताओं से सीधा सवाल
महेश पटेल ने कहा कि यदि कांग्रेस द्वारा उठाया जा रहा जमीन का मुद्दा गलत है तो भाजपा नेता लिखित रूप से जवाब दें कि प्रभावित किसानों की जमीन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा— “केवल कांग्रेस पर आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलेगी। यदि हम गलत हैं तो सरकार लिखकर दे कि किसानों की जमीन प्रभावित नहीं होगी। यदि सरकार लिखकर देने को तैयार नहीं है तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है।”
जमीन खरीद-बिक्री और दस्तावेजों की जांच की मांगमहेश पटेल ने क्षेत्र में आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की भी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों की खरीद-बिक्री संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, उनके दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कांग्रेस प्रशासन से लेकर न्यायालय तक इस मुद्दे को उठाएगी और आदिवासी किसानों के अधिकारों की कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी। “भाजपा की सरकार है तो भाजपा के मंत्री ही सरकार के खिलाफ क्यों?” महेश पटेल ने कहा कि आज पूरे जिले की जनता के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है—
सरकार भाजपा की है। मुख्यमंत्री भाजपा के हैं।
कैबिनेट भाजपा की है। मंत्री भाजपा के हैं।
सांसद भाजपा के हैं।
जिला पंचायत और जनपद पंचायतों में भी भाजपा का प्रभाव है। फिर भाजपा के मंत्री को अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना क्यों देना पड़ रहा है? उन्होंने कहा कि जनता अब सब देख और समझ रही है। भाजपा नेताओं को कांग्रेस पर आरोप लगाने के बजाय अपनी सरकार से जवाब मांगना चाहिए।
“जल-जंगल-जमीन की लड़ाई अंतिम दम तक जारी रहेगी”। महेश पटेल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी किसानों की आवाज दबने नहीं देगी। “हम जल, जंगल और जमीन के सवाल पर पीछे नहीं हटेंगे। आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई गांव से लेकर विधानसभा तक जारी रहेगी। सरकार को जवाब देना होगा और किसानों की जमीन एवं अधिकारों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ”बैठक में प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं और आगामी आंदोलन को लेकर सुझाव दिए। दोनों स्थानों पर हुई रायशुमारी के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रभावित गांवों में जनसंवाद बढ़ाने और आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही।


