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डिवाइडर निर्माण में बड़ा फेरबदल: सम्यक जैन की शिकायत पर आयुक्त सख्त, गलत निर्माण तोड़कर होगा पुनर्निर्माण

नियमविरुद्ध एवं तकनीकी मानकों के विपरीत किया जा रहा था  डिवाइडर निर्माण

डिंडोरी। नगर में डिवाइडर निर्माण को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर अधिवक्ता सम्यक जैन की शिकायत के बाद आयुक्त ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार पूर्व में किया गया नियमविरुद्ध एवं तकनीकी मानकों के विपरीत डिवाइडर निर्माण पूर्णतः तोड़कर हटाया जाएगा तथा इसके स्थान पर डबल लेन सड़क की वास्तविक चौड़ाई, यातायात दबाव एवं सड़क सुरक्षा मानकों के अनुरूप पंच तकनीक से नया निर्माण कराया जाएगा। इस निर्णय को नगर की सड़क सुरक्षा, आम नागरिकों की सुविधा एवं शासकीय धन के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए नगर परिषद के मुख्य नगर परिषद अधिकारी द्वारा पूर्व में पदस्थ इंजीनियर को कार्य से पृथक कर डिवाइडर निर्माण की नवीन जिम्मेदारी इंजीनियर अनिकेत सिंह बेंस को सौंपी गई है, जिससे आगे होने वाला निर्माण कार्य तकनीकी रूप से सुदृढ़, पारदर्शी एवं मानकों के अनुरूप हो सके।
वहीं अधिवक्ता सम्यक जैन ने जनहित को ध्यान में रखते हुए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को पुनः पत्र प्रेषित कर डिवाइडर की लंबाई 500 मीटर के स्थान पर 1000 मीटर किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान यातायात दबाव, दुर्घटनाओं की बढ़ती संभावना तथा नगर के विस्तार को देखते हुए सीमित लंबाई का डिवाइडर उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा। साथ ही ₹25 लाख के पूर्व स्वीकृत अनुमान को निरस्त कर वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप नया, यथार्थ एवं गुणवत्ता-आधारित अनुमान तैयार कराने की भी मांग की गई है, ताकि निर्माण कार्य केवल कागजी औपचारिकता न रह जाए।
सौंदर्यीकरण के संबंध में यह भी अपेक्षा जताई गई है कि डिवाइडर पर केवल रंग-रोगन तक सीमित न रहते हुए व्यवस्थित पौधरोपण, लो-मेंटेनेंस हरित पट्टी, रिफ्लेक्टिव साइनज, सोलर-आधारित लाइटिंग, रोड विजिबिलिटी बढ़ाने वाले एलिमेंट्स तथा सौंदर्य व सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया जाए। इससे न केवल नगर की सुंदरता में वृद्धि होगी, बल्कि रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
नगरवासियों का मानना है कि यदि यह निर्माण कार्य गुणवत्ता, सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के संतुलन के साथ कराया जाता है, तो यह पहल भविष्य में नगर के अन्य विकास कार्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बनेगी और जनहित में पारदर्शी विकास की दिशा तय करेगी।

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