मनावर शिक्षा विभाग में पिता-पुत्र प्रकरण ने खड़े किए कई गंभीर सवाल… जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का इंतजार
जिला रिपोर्टर
मनावर। जिला धार।। शासकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय मनावर में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत उमर मंसूरी की नियुक्ति, आयु, शैक्षणिक दस्तावेजों तथा कथित दो स्थानों पर उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग की जांच के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।
विभागीय जांच दल की रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के अनुसार उमर मंसूरी की प्रथम नियुक्ति वर्ष 2022 में हुई थी। उपलब्ध अंकसूची में उनकी जन्मतिथि 19 दिसंबर 2005 दर्ज है, जबकि 29 जुलाई 2022 को उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में आमंत्रित किया गया। इस आधार पर नियुक्ति के समय उनकी उम्र करीब 16 वर्ष 7 माह 10 दिन बनती है। अब सवाल यह है कि निर्धारित आयु एवं पात्रता की जांच के बिना इतनी कम उम्र में अतिथि शिक्षक के रूप में चयन कैसे हुआ?
*जांच दल की रिपोर्ट में उम्र और डीएलएड को लेकर सवाल*
विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनावर द्वारा जांच आदेश क्रमांक स्थापना/2026/2573, दिनांक 2 सितंबर 2026 के माध्यम से जांच दल गठित किया गया था। जांच दल द्वारा शासकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय पहुंचकर दस्तावेजों एवं उपस्थिति संबंधी जानकारी का परीक्षण किया गया।
रिपोर्ट के पैरा-3 में उमर मंसूरी की प्रथम नियुक्ति से संबंधित जानकारी दर्ज होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा के आधार पर तत्कालीन संकुल प्राचार्य द्वारा शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में आमंत्रित किया गया था। वहीं उनकी अंकसूची में जन्मतिथि 19 दिसंबर 2005 दर्ज होने से नियुक्ति के समय आयु को लेकर गंभीर प्रश्न खड़ा होता है।
रिपोर्ट के पैरा-4 में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया है। इसमें उमर मंसूरी के शैक्षणिक सत्र 2021-22 एवं 2022-23 में डीएलएड अध्ययनरत होने संबंधी जानकारी का उल्लेख है। जांच में उपस्थिति का सत्यापन भी किया गया। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि जिस अवधि में वे डीएलएड की पढ़ाई कर रहे थे, उसी अवधि में अतिथि शिक्षक के रूप में उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई।
*एक ही समय में दो स्थानों की उपस्थिति का दावा, रिकॉर्ड से हो खुलासा*
मामले में सबसे गंभीर सवाल कथित रूप से दो स्थानों पर उपस्थिति का है। यदि उमर मंसूरी की एक ही अवधि में अलग-अलग संस्थानों में उपस्थिति दर्ज है, तो संबंधित विभाग को दोनों संस्थानों के उपस्थिति रजिस्टर, प्रवेश रिकॉर्ड, परीक्षा रिकॉर्ड, अतिथि शिक्षक उपस्थिति और मानदेय भुगतान का मिलान कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सिर्फ आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय विभागीय रिकॉर्ड से यह सामने आना चाहिए कि संबंधित अवधि में उमर मंसूरी वास्तव में कहां उपस्थित थे और किस आधार पर उनका मानदेय जारी हुआ।
*नियुक्ति प्रक्रिया में किस स्तर पर हुई पात्रता की जांच?*
अतिथि शिक्षक चयन प्रक्रिया में सामान्यतः अभ्यर्थी की शैक्षणिक योग्यता, आयु, संबंधित प्रशिक्षण, दस्तावेज और पात्रता का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सवाल यह है कि उमर मंसूरी की नियुक्ति के समय इन दस्तावेजों का सत्यापन किस अधिकारी या संस्था द्वारा किया गया था?
यदि नियुक्ति के समय रिकॉर्ड में जन्मतिथि स्पष्ट रूप से उपलब्ध थी, तो इतनी कम उम्र में नियुक्ति के लिए पात्रता किस आधार पर स्वीकार की गई? यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति थी तो उसका सत्यापन किस स्तर पर हुआ? इन सवालों का जवाब विभागीय दस्तावेज ही दे सकते हैं।
*तत्कालीन प्रधानाध्यापक की भूमिका पर भी उठे सवाल*
मामले में तत्कालीन प्रधानाध्यापक एवं शाला प्रबंधन समिति के सचिव फिरोज मंसूरी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार उमर मंसूरी के अतिथि शिक्षक चयन की प्रक्रिया में शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा शामिल थी।
फिरोज मंसूरी के संबंध में पूर्व में विद्यालय से जुड़े मामलों को लेकर विभागीय कार्रवाई होने का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में उनके सेवा रिकॉर्ड, पदस्थापना, वेतन भुगतान तथा विद्यालय में लंबे समय तक कार्यरत रहने से संबंधित दस्तावेजों का भी स्वतंत्र परीक्षण किए जाने की मांग उठ रही है।
*10 साल की सेवा और वेतन रिकॉर्ड की भी हो जांच*
मामले में फिरोज मंसूरी की करीब दस वर्षों की सेवा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि पूर्व में किसी मामले में निलंबन अथवा विभागीय कार्रवाई हुई थी, तो उसकी बहाली, पदस्थापना और उसके बाद की सेवा अवधि का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सवाल यह भी है कि यदि किसी स्तर पर सेवा संबंधी अनियमितता सामने आई थी, तो उसके बाद वेतन भुगतान और पदस्थापना से संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण कब और किस स्तर पर किया गया? विभाग के पास इन सभी सवालों के जवाब सेवा पुस्तिका, आदेशों और वेतन रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध होने चाहिए।
*जांच रिपोर्ट के बाद अब कार्रवाई या स्पष्टीकरण का इंतजार*
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल विभागीय कार्रवाई को लेकर है। जांच दल ने यदि दस्तावेजों का परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है तो उसके आधार पर आगे क्या कार्रवाई की गई? संबंधित अधिकारियों द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया, आयु, डीएलएड अध्ययन, उपस्थिति और मानदेय भुगतान का विस्तृत सत्यापन किया गया या नहीं?
यदि रिकॉर्ड सही हैं तो विभाग दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करे और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मामले में संबंधित विभाग से मांग है कि उमर मंसूरी की अतिथि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया, पात्रता दस्तावेज, शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा, संकुल स्तर पर किया गया सत्यापन, उपस्थिति रजिस्टर, डीएलएड रिकॉर्ड तथा मानदेय भुगतान का मिलान कर तथ्य सार्वजनिक किए जाएं। इससे आरोपों और वास्तविक रिकॉर्ड के बीच स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
