सोंडवा में गूंजी बांसुरी की धुन, आदिवासी संस्कृति को सहेजने का संकल्प दिलाया
Deepak Sharma correspondence
सोंडवा (अलीराजपुर) आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व में सोंडवा में आयोजित बांसुरी प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली। पारंपरिक बांसुरी वादन, लोकसंगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ा।
बांसुरी प्रतियोगिता में सोंडवा और भिताड़ा की टीम को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार ₹11,111, मोराजी की टीम को द्वितीय पुरस्कार ₹5,555 तथा ग्राम सुगहट की टीम को तृतीय पुरस्कार ₹3,335 प्रदान किया गया। विजेता टीमों को सम्मानित कर उनकी प्रतिभा का उत्साहवर्धन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से है। बांसुरी, लोकगीत, लोकसंगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्र, लोकनृत्य, वेशभूषा और रीति-रिवाज पीढ़ियों से चली आ रही हमारी धरोहर हैं।
इन्हें संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस पहल को केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
हर गांव से युवाओं की सांस्कृतिक टीमें तैयार की जाएंगी, जो बांसुरी वादन, लोकसंगीत, लोकनृत्य और अन्य पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाएंगी। आने वाले वर्षों में भी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं टीमों को सम्मानित किया जाएगा।
15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती पर भव्य आयोजन
महेश पटेल ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की भी घोषणा की गई।
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकारों के प्रतीक हैं। उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए समाज को अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बिरसा मुंडा जयंती का आयोजन और व्यापक स्तर पर किया जाएगा, जिसमें पूरे अलीराजपुर जिले के समाजजनों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास रहेगा। जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर भी जोर
कार्यक्रम में क्षेत्र की पानी, बिजली, सिंचाई, सड़क और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया गया।
महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद कई गांवों को पानी और रोजगार की समस्या का सामना करना पड़ता है। रोजगार की तलाश में लोगों को गुजरात सहित अन्य क्षेत्रों में पलायन करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि “जल, जंगल और जमीन हमारे समाज की बुनियादी पहचान और अधिकारों से जुड़े विषय हैं। इन मुद्दों को लेकर समाज को संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी होगी।”
महेश पटेल ने युवाओं से समाज की जिम्मेदारी आगे बढ़कर संभालने का आह्वान करते हुए कहा कि “आज जरूरत है कि युवा अपनी संस्कृति को बचाने के साथ समाज के अधिकारों और विकास के मुद्दों के लिए भी आगे आएं।”
कार्यक्रम में पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश राठौर, कैलाश, मोहन भाई, अंगार चौहान, झमराला, खुमला, हिंगाभाई, सरदार भाई सहित क्षेत्र के सरपंच, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में युवा एवं समाजजन उपस्थित रहे।
बांसुरी प्रतियोगिता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति की विविधता और समृद्धता देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को संरक्षण देना, युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ना और आने वाली पीढ़ी तक आदिवासी विरासत को पहुंचाना रहा।
