संवाददाता निलेश कलसकर अखंड भारत न्यूज़ पांढुरना
पांढुर्णा। जिले में इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण खरीफ की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। खेतों में खड़ी सोयाबीन, कपास और मक्का की फसल सूखकर नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। प्राकृतिक आपदा की इस मार के बीच प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भी किसानों को राहत नहीं मिल पा रही है।
किसानों का आरोप है कि उनके बैंक खातों से फसल बीमा का प्रीमियम तो समय पर काट लिया गया, लेकिन आज तक एक भी किसान को बीमा पॉलिसी बॉन्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। पॉलिसी नंबर और शर्तें न होने के कारण किसान यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि सूखे की स्थिति में क्लेम कैसे और कहां दर्ज करें।
नियमानुसार स्थानीय आपदा में 72 घंटे के भीतर क्लेम सूचना देना अनिवार्य है, जबकि सूखे जैसी व्यापक आपदा में क्रॉप कटिंग प्रयोग (CCE) के आधार पर मुआवजा तय होता है। पॉलिसी बॉन्ड न होने से दोनों ही प्रक्रियाओं में किसान उलझ कर रह गए हैं।
ज्ञापन के बाद भी प्रशासन मौन
इस लापरवाही को लेकर वार्ड पार्षद दुर्गेश उईके द्वारा 5 अगस्त को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सभी बीमित किसानों को पॉलिसी बॉन्ड उपलब्ध कराने और सूखा प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की गई थी। किसानों का कहना है कि ज्ञापन सौंपे दो माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो बीमा कंपनी और न ही कृषि विभाग ने कोई ठोस कदम उठाया है।
पार्षद उईके ने बताया कि "बैंक प्रीमियम काट रहे हैं, बीमा कंपनी प्रीमियम ले रही है, लेकिन किसान के हाथ में कोई दस्तावेज नहीं है। यह सीधे तौर पर किसानों के अधिकारों का हनन है।"
किसानों की मांग
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि –
1. सभी बीमित किसानों को तत्काल पॉलिसी बॉन्ड वितरित किए जाएं। 2. सूखा प्रभावित गांवों में राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से सर्वे कराया जाए। 3. फसल बीमा का क्लेम और सूखा राहत राशि जल्द से जल्द किसानों के खातों में जमा की जाए।
यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
