संवाददाता निलेश कलसकर अखंड भारत न्यूज़ पांढुर्णा
पांढुर्णा । किसानों की फसल नुकसानी के शासकीय पंचनामों को गायब करने और आरटीआई में सूचना न देने के मामले में मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सूचना आयुक्त ओंकार सिंह ने द्वितीय अपील (प्रकरण क्र. ए-4930/2023) की सुनवाई में तत्कालीन तहसीलदार एवं लोक सूचना अधिकारी तहसील पांढुर्णा को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के तहत अधिकतम 25,000 रुपये की शास्ति अधिरोपित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया है।
आयोग ने जिला कलेक्टर पांढुर्णा को धारा 18(1) के तहत एक माह के भीतर सक्षम अधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला
अपीलार्थी मंसाराम खोडे (पुत्र उमेश खोडे द्वारा प्रतिनिधित्व) ने तहसील कार्यालय पांढुर्णा में आरटीआई आवेदन देकर दिनांक 04.02.2023 (खरीफ), 16.03.2023 और 18.04.2023 (रबी) को खेत में हुई फसल नुकसानी के संबंध में जांच टीम द्वारा तैयार पंचनामों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।
लोक सूचना अधिकारी द्वारा केवल 18.04.2023 का पंचनामा उपलब्ध कराया गया, जबकि 04.02.2023 और 16.03.2023 के पंचनामे कार्यालय में उपलब्ध न होने का हवाला देकर देने से इनकार कर दिया गया।
आयोग के प्रमुख निर्देश
आयोग ने आदेशित किया है कि यदि 04.02.2023 एवं 16.03.2023 के दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध हैं, तो तृतीय पक्ष की व्यक्तिगत जानकारी को आरटीआई अधिनियम की धारा 10 के तहत पृथक कर निःशुल्क प्रमाणित प्रतियां एक माह के भीतर अपीलार्थी को दी जाएं।
तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तहसीलदार वीर बहादुर सिंह धुर्वे की व्यक्तिगत सुनवाई आगामी 08 अक्टूबर 2026 को नियत की गई है।
छेड़छाड़ का भी आरोप
आवेदक पक्ष का आरोप है कि आर.आई., पटवारी, कृषि विभाग के अधिकारियों और स्थानीय किसानों की मौजूदगी में विधिवत पंचनामे तैयार किए गए थे, जिनके साक्ष्य उनके पास सुरक्षित हैं। अधिकारियों द्वारा पंचनामों को कार्यालय से हटाकर किसानों को उचित मुआवजे से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, 18.04.2023 के दिए गए पंचनामे की प्रतिलिपि में भी छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। आवेदक के अनुसार खेत में पंचनामा बनाते समय और किसानों के हस्ताक्षर लेते समय खेत में कोई फसल नहीं थी और नुकसानी नहीं लिखी गई थी, बाद में उसमें 20 प्रतिशत नुकसानी दर्ज कर दी गई।
राज्य सूचना आयोग के इस आदेश के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
