एसडीएम के निर्देश पर चस्पा सूचना से बढ़ी चर्चा, संस्था प्रमुख की अनुमति के बिना स्कूल में प्रवेश नहीं…..
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। शासकीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर एसडीएम मनावर द्वारा जारी निर्देश के बाद अब पत्रकारों के स्कूलों में पहुंचकर मौके की पड़ताल करने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 14 सितंबर 2026 को जारी निर्देश के अनुसार विद्यालय में कोई भी अनाधिकृत बाहरी व्यक्ति बिना बीईओ अथवा संकुल प्राचार्य की अनुमति के प्रवेश नहीं कर सकेगा। इसके बाद यह सूचना शासकीय विद्यालयों में चस्पा की गई है।
आदेश में विद्यालयों में अनधिकृत प्रवेश रोकने की बात कही गई है। हालांकि, इस व्यवस्था का एक व्यावहारिक पक्ष यह भी है कि यदि किसी शासकीय स्कूल या छात्रावास में अनियमितता, भ्रष्टाचार, विद्यार्थियों की सुविधाओं में कमी अथवा नियम विरुद्ध गतिविधि की शिकायत सामने आती है, तो मौके पर जाकर वस्तुस्थिति जानने में पत्रकारों के सामने अनुमति की बाध्यता आ सकती है। ऐसे में संस्था प्रमुख की अनुमति मिलने तक खबर की तत्काल पड़ताल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
*सुरक्षा जरूरी, लेकिन निगरानी और पारदर्शिता भी जरूरी*
विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, अनुशासन और बाहरी लोगों की अनावश्यक आवाजाही को नियंत्रित करना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वहीं शासकीय संस्थानों में होने वाले कार्यों, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सार्वजनिक निगरानी भी आवश्यक है।
भारतीय प्रेस परिषद के अनुसार प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित करना तथा सार्वजनिक हित और महत्व की खबरों के प्रसार को प्रभावित करने वाले घटनाक्रमों पर नजर रखना उसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। परिषद के पत्रकारिता आचरण संबंधी मानकों में भी पत्रकारों से स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और संयम बरतने की अपेक्षा की गई है।
*क्या हर शिकायत पर पहले अनुमति लेना जरूरी होगा?*
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी विद्यालय या छात्रावास से संबंधित गंभीर शिकायत तत्काल प्राप्त होती है और पत्रकार मौके की वास्तविक स्थिति जानना चाहता है, तो क्या उसे संस्था प्रमुख अथवा विभागीय अधिकारी की अनुमति का इंतजार करना होगा? यदि ऐसा होता है तो शिकायत की स्वतंत्र एवं तत्काल पड़ताल प्रभावित हो सकती है।
पत्रकारिता का दायित्व केवल कार्यक्रमों और उपलब्धियों की खबर प्रकाशित करना ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन से संचालित संस्थानों की व्यवस्थाओं और जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाना भी है। हालांकि, इस दौरान विद्यार्थियों की निजता, सुरक्षा, शैक्षणिक व्यवस्था और संस्था के अनुशासन का भी पूरा ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
*प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग*
पत्रकारों के बीच यह मांग उठ रही है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि 14 सितंबर के निर्देश में “बाहरी व्यक्ति” की श्रेणी में प्रेस द्वारा अधिकृत पत्रकारों को किस प्रकार देखा गया है। यदि पत्रकार किसी शिकायत, जनहित के मामले या शासकीय व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की रिपोर्टिंग के लिए विद्यालय पहुंचता है, तो उसके लिए क्या अलग प्रक्रिया निर्धारित है।
सवाल यह भी है कि सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर ऐसा कोई प्रावधान तो नहीं बन रहा, जिससे शासकीय संस्थानों की स्वतंत्र मीडिया निगरानी प्रभावित हो।
प्रशासन द्वारा इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने से विद्यालयों की सुरक्षा और पत्रकारिता की स्वतंत्रता—दोनों के बीच संतुलन कायम किया जा सकता है।
