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कोयलांचल में अवैध खनन क्या सचमुच थम गया या यह सिर्फ़ कुछ दिनों की खामोशी है?अवैध खनन से छलनी कोयलांचल की धरती को केंद्र सरकार का मरहम या सियासत ?

कोयलांचल में अवैध खनन क्या सचमुच थम गया या यह सिर्फ़ कुछ दिनों की खामोशी है?अवैध खनन से छलनी कोयलांचल की धरती को केंद्र सरकार का मरहम या सियासत ?
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धनबाद से विशेष रिपोर्ट

धनबाद के कोयलांचल की फिज़ाओं में इन दिनों एक अलग ही सुकून महसूस किया जा रहा है। धनबाद और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में वर्षों से जारी अवैध खनन की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार की सख्ती के बाद CISF में नए DIG की तैनाती और उनके नेतृत्व में अवैध खनन के खिलाफ चल रही लगातार कार्रवाई को माना जा रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर केंद्र सरकार छह वर्षों तक चुप रहने के बाद अब अचानक क्यों सक्रिय हुई? क्या झारखंड में व्यापक पैमाने पर हो रहे अवैध खनन, लगातार बढ़ती भू-धंसान की घटनाओं और राष्ट्रीय संपत्ति की लूट ने अब जाकर सरकार का ध्यान खींचा है, या इसके पीछे कोई और वजह है?कोयलांचल की धरती को शायद अंग्रेजों ने भी उतना नुकसान नहीं पहुंचाया होगा, जितना पिछले छह वर्षों में अवैध खनन ने पहुंचाया है। जगह-जगह अवैध सुरंगों ने जमीन को खोखला कर दिया है। पिछले दो वर्षों में भू-धंसान की घटनाओं में जिस तेजी से वृद्धि हुई है, वह पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।इधर झरिया के बेलगढ़िया टाउनशिप में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी तेज हुई है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या BCCL अपनी परियोजनाओं के विस्तार की तैयारी कर रही है, या फिर यह बढ़ते भू-धंसान के खतरे को देखते हुए मजबूरी में उठाया गया कदम है?सूत्रों के अनुसार फिलहाल अवैध खनन पर काफी हद तक अंकुश लगा है। CISF की लगातार और ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध कोयला तस्करों में भय का माहौल है। विशेष रूप से MMDR Act के तहत CISF को मिली FIR करने की शक्तियों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर अवैध मुहानों को बंद किया गया है और बड़ी मात्रा में अवैध कोयला जब्त किया गया है।हालांकि, एक बड़ा सवाल अब भी बाकी है। जिन अवैध मुहानों पर कार्रवाई की जा रही है, क्या उन्हें DGMS के मानकों के अनुसार स्थायी रूप से बंद किया जा रहा है? यदि ऐसा नहीं हुआ, तो कुछ समय बाद इन्हीं मुहानों से दोबारा अवैध खनन शुरू होने की आशंका बनी रहेगी।स्थानीय लोगों की मांग है कि DGMS भी खुलकर सामने आए और जिन स्थानों पर अवैध खनन पकड़ा गया है, वहां वैज्ञानिक तरीके से अवैध सुरंगों और मुहानों को स्थायी रूप से बंद कराया जाए। केवल छापेमारी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीन को और अधिक खोखला होने से रोकने के लिए स्थायी कार्रवाई जरूरी है।अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान केवल कुछ दिनों की कार्रवाई बनकर रह जाता है या वास्तव में कोयलांचल को अवैध खनन से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होता है। यदि CISF, BCCL और DGMS मिलकर लगातार और ईमानदारी से कार्रवाई करते हैं, तभी कोयलांचल की धरती को दोबारा छलनी होने से बचाया जा सकता है।कोयलांचल के लोगों की यही उम्मीद है कि इस बार कार्रवाई केवल दिखावा नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत बने।

अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट ✍️