संवाददाता निलेश कलसकर अखंड भारत न्यूज़ पांढुरना
देश में जैविक और प्राकृतिक खेती का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। नेताओं की डीपी पर गोबर-गोमूत्र से समृद्धि के नारे चमक रहे हैं। अच्छी बात है, पर सवाल ये है – गोबर आएगा कहां से?
गौवंश कत्लखानों की ओर धकेला जा रहा है। गांव-गांव में आवारा गायें भूख से मर रही हैं, किसान छुट्टा पशुओं से परेशान है। और जो सरकार गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा तक नहीं दे पाई, वही विदेशों में जाकर डंका बजा रही है कि भारत बीफ निर्यात में दुनिया में दूसरे नंबर पर है। ये कैसा गौ-प्रेम है?
महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। रसोई गैस के दाम आसमान पर, पेट्रोल-डीजल में मिलावट के आरोप, खाद-कीटनाशक के भाव सुनकर किसान कांप जाता है। फसल का भाव नहीं मिलता, लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जाती है।
छात्रों का भविष्य पेपर लीक माफिया खा रहा है। सरकारी स्कूलों में टीचर नहीं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, इलाज नहीं। बैंक आम जनता को लूट रहे हैं। जितनी करेंसी देश में नहीं, उससे ज्यादा के लोन हवा में नंबरों से बांट दिए गए। अब PhonePe-Google Pay पर भी लूट की तैयारी है।
विपक्ष कह रहा वोट चोरी करके सरकारें बनाई जा रही हैं। दूध से ज्यादा शराब महंगी बिक रही है। ठेकों पर रेट बोर्ड गायब है, हर बोतल पर MRP से ज्यादा वसूली हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल – उद्योगपतियों के हजारों करोड़ के लोन माफ करने के लिए सरकार के पास पैसा है, पर किसान का कर्ज माफ करने के लिए खजाना खाली है?
ये प्रचार नहीं, जनता के साथ धोखा है। दिखावे को नमस्कार करने का समय गया, अब हिसाब मांगने का समय है।
