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लुन्हेरा बुजुर्ग की पहाड़ी में 20 फीट तक लंबे प्राकृतिक पत्थर

भूरिया कुआं मजरे की पहाड़ी पर चट्टानों की अनोखी संरचना, भू-विज्ञान और पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच से खुल सकता है रहस्य........ रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597 मनावर। जिला…

लुन्हेरा बुजुर्ग की पहाड़ी में 20 फीट तक लंबे प्राकृतिक पत्थर
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भूरिया कुआं मजरे की पहाड़ी पर चट्टानों की अनोखी संरचना, भू-विज्ञान और पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच से खुल सकता है रहस्य……..

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। मनावर तहसील के ग्राम पंचायत लुन्हेरा बुजुर्ग के भूरिया कुआं मजरे की छोटी पहाड़ी पर मौजूद विशाल शैलखंड इन दिनों लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं। पहाड़ी पर एक-दूसरे से सटे और कतारनुमा खड़े दिखाई देने वाले इन पत्थरों की लंबाई स्थानीय लोगों के अनुसार 10 से 20 फीट या इससे भी अधिक है। काले-भूरे रंग के ये विशाल पत्थर दूर से देखने पर किसी प्राचीन निर्माण के अवशेष जैसे नजर आते हैं, जबकि इनके आसपास बिखरे छोटे-बड़े शैलखंड इस पूरे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना को भी खास बनाते हैं।

पहाड़ी पर चट्टानों की बनावट ने खींचा ध्यान…

मौके की तस्वीर में कई विशाल चट्टानें एक साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं। कुछ शैलखंड लंबे और सीधे हैं, जबकि कई चट्टानें आसपास जमीन पर बिखरी हुई नजर आती हैं। बारिश के मौसम में पहाड़ी पर हरियाली के बीच उभरती इन गहरी रंग की चट्टानों की संरचना इसे अन्य सामान्य पहाड़ियों से अलग स्वरूप देती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पत्थर सामान्य रूप से जमीन पर पड़े हुए नहीं हैं, बल्कि पहाड़ी की प्राकृतिक संरचना का हिस्सा दिखाई देते हैं। वर्षों से ग्रामीण इन्हें देखते आ रहे हैं, लेकिन इनकी उत्पत्ति और वास्तविक स्वरूप को लेकर अब तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है।

मांडव निर्माण से जोड़कर भी होती है चर्चा….

क्षेत्र में एक लोकमान्यता यह भी है कि पुराने समय में मांडव के निर्माण के दौरान आसपास के क्षेत्रों से बड़े पत्थर ले जाए जाते थे। इसी जनचर्चा के आधार पर कुछ लोग इन शैलखंडों को मांडव की ऐतिहासिक निर्माण गतिविधियों से जोड़कर देखते हैं। यह भी कहा जाता है कि संभव है कि पत्थर निकालने अथवा ले जाने के दौरान कुछ शैलखंड इसी क्षेत्र में रह गए हों।

हालांकि, मांडव निर्माण से इन चट्टानों के संबंध की अभी कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय जन चर्चा और संभावित इतिहास के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

वैज्ञानिक जांच से सामने आ सकता है असली रहस्य…

विशेषज्ञों के अध्ययन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पहाड़ी पर दिखाई दे रहे ये विशाल शैलखंड पूरी तरह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम हैं अथवा इनमें किसी प्राचीन मानवीय गतिविधि के संकेत भी मौजूद हैं। चट्टानों की संरचना, उनकी परतें, खनिज composition, टूटने का पैटर्न और पहाड़ी के आसपास के भू-भाग का अध्ययन इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

यदि क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक सर्वे कराया जाता है तो इससे न केवल इन चट्टानों की वास्तविक उम्र और उत्पत्ति का पता चल सकता है, बल्कि क्षेत्र के प्राचीन भौगोलिक और ऐतिहासिक स्वरूप को समझने में भी मदद मिल सकती है।

शोध के साथ पर्यटन की संभावनाएं भी….

लुन्हेरा बुजुर्ग की इस पहाड़ी पर मौजूद अनोखी चट्टानों को व्यवस्थित रूप से चिह्नित कर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए तो यह क्षेत्र भविष्य में भू-विज्ञान, पुरातत्व और स्थानीय इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। फिलहाल यह स्थान स्थानीय लोगों के बीच चर्चा और जिज्ञासा का विषय है।

जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर विशेषज्ञों से सर्वे कराएं। प्राकृतिक संरचना है तो उसका भू-वैज्ञानिक महत्व सामने आए और यदि इतिहास से कोई कड़ी जुड़ी है तो उसका दस्तावेजी प्रमाण सामने आए।

फोटो : लुन्हेरा बुजुर्ग के भूरिया कुआं मजरे की पहाड़ी पर दिखाई दे रहे विशाल शैलखंड।