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30 थाना क्षेत्रों में भू-धंसान का खतरा, बीसीसीएल को किया अलर्ट विशेष शाखा की रिपोर्ट के बाद जिला खनन पदाधिकारी ने बीसीसीएल से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट, कई इलाकों में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा*

30 थाना क्षेत्रों में भू-धंसान का खतरा, बीसीसीएल को किया अलर्ट  विशेष शाखा की रिपोर्ट के बाद जिला खनन पदाधिकारी ने बीसीसीएल से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट, कई इलाकों में कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा*
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Dhanbadकोयलांचल में एक बार फिर भू-धंसान और गोफ का खतरा गहरा गया है। झारखंड विशेष शाखा, रांची की रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जिला खनन पदाधिकारी ने बीसीसीएल प्रबंधन को पत्र भेजकर झरिया, लोयाबाद, सुदामडीह और तेतुलमारी को सबसे ज्यादा संवेदनशील बताया है।रिपोर्ट के अनुसार झरिया थाना क्षेत्र के चांदमारी, मांझी बस्ती, बोकापहाड़ी, इंदिरा चौक, झरिया स्टेशन, सिंहनगर, गोपालीचक और झरिया-केंदुआडीह मार्ग के कई हिस्से अत्यंत संवेदनशील हैं। वहीं लोयाबाद, सुदामडीह, पुटकी, कतरास, अलकडीहा, बरोरा और तेतुलमारी के कई इलाके भी खतरे की जद में हैं।जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चिह्नित संवेदनशील स्थलों की जांच करने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वहीं की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।–विशेष शाखा की रिपोर्ट में इन थाना क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खतरा बताया गया है—झरिया थाना क्षेत्र, धनसार थाना क्षेत्र।–यहां बन चुका है गोफ:इंदिरा चौक, झरिया, सिदपोकी, तेतुलिया।–अन्य संवेदनशील क्षेत्र:पुटकी थाना क्षेत्र, तेतुलमारी थाना क्षेत्र, लोयाबाद थाना क्षेत्र, जोगता थाना क्षेत्र, कतरास थाना क्षेत्र, निरसा थाना क्षेत्र, सुदामडीह थाना क्षेत्र, महुदा क्षेत्र, गोंदूडीह, धोबीकुल्ही, मंडल केंदुआडीह, मुराईडीह, बरोरा क्षेत्र, पाथरडीह थाना क्षेत्र।धनबाद जिले के 30 थाना और ओपी क्षेत्रों के दर्जनों स्थानों को भू-धंसान और गोफ बनने की दृष्टि से संवेदनशील बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन इलाकों में कभी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इनमें कई स्थान घनी आबादी वाले हैं, जहां हजारों लोग रहते हैं।पहले भी जा चुकी हैं जानें:रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि पूर्व में केंदुआडीह पुराना थाना क्षेत्र में घटनाएं हो चुकी हैं।मॉनसून में बढ़ जाती है आशंका:प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार बारिश के मौसम में परित्यक्त और अग्नि प्रभावित भूमिगत खदानों के ऊपर स्थित इलाकों में भू-धंसान की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में संवेदनशील इलाकों की निगरानी और लोगों को सतर्क करने की आवश्यकता है।–क्या है गोफ:भूमिगत खदानों के खाली हिस्से की छत धंसने से जमीन पर अचानक गड्ढा बन जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में गोफ कहा जाता है। यह घटना घनी आबादी वाले इलाकों में सबसे बड़ा खतरा माना जाता है।इंदिरा चौक के पास गोफ बनने से पिता-पुत्र की मौत हो गयी थी। जबकि सिदपोकी, तेतुलिया, गोंदूडीह, मुराईडीह और मंडल केंदुआडीह समेत कई इलाकों में पहले भी गोफ बन चुके हैं।