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निमाड़-मालवा के रेल सपने को मिली नई रफ्तार

खंडवा-अलीराजपुर ब्रॉडगेज लाइन से बदलेंगे विकास के रास्ते... कुक्षी-सिंघाना-राजपुर-खरगोन होते हुए खंडवा से जुड़ेगा पश्चिम निमाड़ और आदिवासी अंचल... सर्वे के बाद डीपीआर की दिशा में…

निमाड़-मालवा के रेल सपने को मिली नई रफ्तार
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खंडवा-अलीराजपुर ब्रॉडगेज लाइन से बदलेंगे विकास के रास्ते… कुक्षी-सिंघाना-राजपुर-खरगोन होते हुए खंडवा से जुड़ेगा पश्चिम निमाड़ और आदिवासी अंचल… सर्वे के बाद डीपीआर की दिशा में बढ़ी प्रक्रिया…..

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। पश्चिम निमाड़ और मालवा के बड़े हिस्से को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली प्रस्तावित खंडवा-अलीराजपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन को लेकर क्षेत्रवासियों की उम्मीदें एक बार फिर तेज हुई हैं। वर्षों से उठ रही इस रेल कनेक्टिविटी की मांग के तहत केंद्र सरकार ने करीब 250 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेलमार्ग के अंतिम स्थान सर्वेक्षण (FLS) को मंजूरी दी थी। इसके लिए करीब 6.25 करोड़ रुपए की लागत निर्धारित की गई थी। दिसंबर 2025 में लोकसभा में दिए गए विवरण के अनुसार इस परियोजना का फुट-टू-फुट सर्वे और ड्रोन मैपिंग सहित अंतिम स्थान सर्वेक्षण जारी था। यह प्रस्तावित रेलमार्ग खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जैसे जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जा रहा है। संसद में भी इसे पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ के पांच जिलों को जोड़ने वाली परियोजना के रूप में उल्लेखित किया गया है।

*कुक्षी-सिंघाना से गुजरने वाला संभावित कॉरिडोर*

प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को लेकर क्षेत्र में सामने आ रहे रूट विवरण के अनुसार अलीराजपुर क्षेत्र से शुरू होकर यह रेलमार्ग निमाड़ के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए खंडवा के मुख्य रेल नेटवर्क तक पहुंचने की दिशा में प्रस्तावित है। संभावित मार्ग में नानपुर, धोलिया, कुक्षी, तलवाड़ा, सिंघाना, बोरलाई, राजपुर, जुलवानिया, सेगांव, खरगोन और भीकनगांव जैसे क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं। मनावर क्षेत्र के लिए सिंघाना के निकट से प्रस्तावित रेल संपर्क विशेष महत्व रखता है। यदि प्रस्तावित एलाइनमेंट इसी दिशा में अंतिम रूप लेता है तो मनावर-कुक्षी सहित आसपास के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को निकट भविष्य में रेल नेटवर्क से जुड़ने का बड़ा अवसर मिल सकता है। हालांकि अंतिम स्टेशन सूची और एलाइनमेंट को लेकर रेलवे की औपचारिक अधिसूचना सामने आने के बाद ही प्रत्येक स्टेशन की स्थिति को अंतिम माना जा सकेगा।

*नर्मदा पर बनेगा महत्वपूर्ण रेल संपर्क*

प्रस्तावित मार्ग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में नर्मदा क्षेत्र से रेल कनेक्टिविटी भी शामिल है। बोरलाई क्षेत्र के आसपास नर्मदा नदी पर बड़े रेल पुल की आवश्यकता इस परियोजना को तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। संसद में भी सर्वे के दौरान पहाड़ी क्षेत्र, नदी-नाले, नर्मदा की सहायक नदियों और कृषि भूमि जैसी भौगोलिक चुनौतियों का उल्लेख किया गया था।

*किसानों और व्यापार को मिल सकती है नई दिशा*

रेल लाइन बनने से निमाड़ के कृषि उत्पादों के परिवहन को नया विकल्प मिलने की संभावना है। क्षेत्र में उत्पादित कपास, मिर्च, अनाज और अन्य कृषि उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में रेल परिवहन उपयोगी हो सकता है। इससे माल परिवहन की लागत और समय में कमी आने की संभावना है तथा क्षेत्र के व्यापारिक केंद्रों को नए बाजारों से जोड़ने का रास्ता खुल सकता है। प्रस्तावित रेलमार्ग को लेकर पूर्व में यह भी बताया गया है कि इसके बनने से खंडवा से वडोदरा की रेल दूरी में लगभग 200 किलोमीटर तक की कमी आ सकती है और गुजरात की दिशा में एक वैकल्पिक रेल संपर्क विकसित हो सकता है।

*आदिवासी अंचल के लिए कनेक्टिविटी का बड़ा अवसर*

अलीराजपुर, बड़वानी, धार और खरगोन के कई हिस्सों में रेल संपर्क सीमित रहा है। नई रेल लाइन का उद्देश्य केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए आवागमन आसान होने की संभावना है। अलीराजपुर जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार वर्तमान में अलीराजपुर की रेल कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरात के दाहोद मार्ग से जुड़ा है और क्षेत्र में नए रेल संपर्कों पर काम जारी है।

*सर्वे से डीपीआर तक पहुंची परियोजना की प्रक्रिया*

रेलवे की किसी नई लाइन को जमीन पर उतारने से पहले सर्वेक्षण, एलाइनमेंट, तकनीकी परीक्षण, लागत आकलन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जैसी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं। खंडवा-अलीराजपुर प्रस्ताव के मामले में 2024 में FLS की स्वीकृति के बाद सर्वे कार्य आगे बढ़ा। दिसंबर 2025 के संसदीय रिकॉर्ड में फुट-टू-फुट सर्वे और ड्रोन मैपिंग के जारी रहने की जानकारी दर्ज है।

मार्च 2026 की एक स्थानीय रिपोर्ट में सर्वे कार्य पूरा होने और DPR तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का उल्लेख किया गया है। हालांकि परियोजना के अंतिम एलाइनमेंट, लागत और निर्माण की समयसीमा के संबंध में रेलवे की औपचारिक स्वीकृति और अधिसूचना को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए।

*निमाड़ के लिए नई विकास धुरी बनने की उम्मीद*

खंडवा से अलीराजपुर तक प्रस्तावित यह रेल कड़ी केवल दो शहरों को जोड़ने वाली लाइन नहीं है। इसके मार्ग में आने वाले धार, बड़वानी और खरगोन के क्षेत्र भी इससे प्रभावित होंगे। पूर्वी निमाड़ को पश्चिमी निमाड़ और गुजरात की दिशा में बेहतर रेल संपर्क मिलने से व्यापारिक गतिविधियों, कृषि परिवहन और क्षेत्रीय आवागमन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

लंबे समय से रेल कनेक्टिविटी की मांग कर रहे क्षेत्रवासियों के लिए अब निगाहें अंतिम एलाइनमेंट, DPR, परियोजना स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यदि प्रस्तावित रेल कॉरिडोर को अंतिम स्वीकृति और बजट मिलता है तो यह पश्चिम निमाड़ और आदिवासी अंचल के परिवहन मानचित्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।