रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। आज आदिवासी अंचल में रेल परियोजना के शुभारंभ को लेकर खूब वाहवाही हो रही है, तस्वीरें खिंच रही हैं और श्रेय लेने की होड़ लगी है। लेकिन सवाल यह है कि जिस रेल परियोजना की नींव करीब 18 साल पहले रखी गई थी, उसका इतिहास भाजपा के नेताओं को कौन बताएगा? उक्त बात भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के जिलाध्यक्ष स्वतंत्र जोशी ने व्यक्त करते हुए कहा कि दाहोद–इंदौर रेल परियोजना वर्ष 2007-08 में स्वीकृत हुई थी। इसके बाद 8 फरवरी 2008 को झाबुआ की धरती पर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस रेल परियोजना का भूमिपूजन किया था और उस समय देश के रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव थे। यानी जिस रेल की नींव कांग्रेस के शासनकाल में रखी गई, जिस परियोजना को तत्कालीन सरकार ने स्वीकृति दी और जिसका भूमिपूजन तत्कालीन प्रधानमंत्री ने किया, आज उसी काम का पूरा श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है।
वाह रे राजनीति…! काम पुराना, नींव पुरानी, परियोजना पुरानी… बस श्रेय लेने का तरीका नया है!
आदिवासी अंचल की जनता भोली जरूर है, लेकिन इतिहास नहीं भूली है। जनता यह भी जानती है कि किसने योजना बनाई, किसने स्वीकृति दी, किसने भूमिपूजन किया और आज कौन उसका श्रेय लेने में सबसे आगे खड़ा है। रेल हमारे क्षेत्र के लिए कोई राजनीतिक उपकार नहीं, यह आदिवासी अंचल के वर्षों पुराने संघर्ष और अधिकार की सौगात है।
हम रेल आने की खुशी जरूर मनाएंगे, लेकिन इतिहास को मिटाकर नहीं। श्रेय जिसका है, उसे श्रेय मिलना चाहिए… और राजनीति के लिए इतिहास को बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। रेल आई है, स्वागत है… लेकिन याद रखिए—रेल की पटरियां नई हैं, इतिहास पुराना है!
धार जिले की गंधवानी विधानसभा के ग्राम टांडा में रेल परियोजना के शुभारंभ के शुभ अवसर पर नेता प्रतिपक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक उमंग सिंघार के प्रतिनिधि के रूप में स्वतंत्र जोशी ने शामिल होकर क्षेत्रवासियों को मिली इस महत्वपूर्ण सौगात के लिए समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह परियोजना हमारे क्षेत्र के विकास को नई गति देने के साथ-साथ नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।
