
रेवाड़ी/कोसली — होशियार सिंह, अखंड भारत न्यूज
कोसली स्थित देवी माता मंदिर/मठ से जुड़े विवाद को लेकर शिकायतकर्ताओं ने मठ एवं देवी माता मंदिर पर नियुक्त प्रशासक एसडीएम कोसली पर मंडल आयुक्त गुरुग्राम तथा उपायुक्त रेवाड़ी के आदेशों की अनुपालना नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मंडल आयुक्त गुरुग्राम द्वारा दिनांक 08 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के बावजूद अब तक शिकायतकर्ता को शिकायत पर की गई कार्रवाई के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि आदेशों के बावजूद कार्रवाई की स्थिति से उन्हें अवगत क्यों नहीं कराया गया।
वहीं, ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि कोसली जैसे बड़े गांव में मठ एवं देवी माता मंदिर पर नियुक्त प्रशासक एसडीएम कोसली के द्वारा गांव के कुछ चुनिंदा लोगों को ही प्राथमिकता क्यों दी जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सरपंच श्री रामकिशन तथा मठ कमेटी के सदस्य संजय कुमार पुत्र बिजेंद्र सिंह, कोसली को प्रशासक एसडीएम द्वारा विशेष महत्व दिया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, 10 मार्च 2026 को गांववासियों की ओर से एसडीएम कोसली को लगभग 18-20 गणमान्य व्यक्तियों एवं लम्बरदारों की सूची भेजी गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस सूची पर व्यापक विचार करने के बजाय केवल पांच व्यक्तियों की निगरानी कमेटी गठित कर दी गई। चयनित पांचों व्यक्ति सरपंच व एसडीएम के साथ निकट संबंध है पांच लोगों की निगरानी कमेटी गठित कर के मठ कमेटी के सदस्य संजय को निर्माण कार्य करने की छूट भी दे दी है इस से स्पष्ट प्रतीत होता है कि मठ के लाखों रुपयों के घोटाले में माननीय एसडीएम साहब कोसली भी लिप्त नज़र आ रहे हैं निगरानी कमेटी के सदस्य लम्बरदार विजय आजाद सिंह को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं कि पूर्व में उनके और सरपंच के प्रभाव के चलते देवी माता मंदिर में प्रस्तावित भंडारे को आयोजित नहीं होने दिया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने मंदिर-मठ की संपत्ति एवं लाखों रुपये से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा गठित निगरानी व्यवस्था निष्पक्ष है तो कमेटी के गठन की प्रक्रिया, सदस्यों के चयन का आधार तथा निर्माण कार्यों की अनुमति से संबंधित सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
शिकायतकर्ताओं ने मंडल आयुक्त गुरुग्राम एवं उपायुक्त रेवाड़ी से मांग की है कि 08 अप्रैल 2026 के आदेश की अनुपालना की स्थिति स्पष्ट कराई जाए, शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दी जाए तथा मठ-देवी माता मंदिर से संबंधित संपत्ति, निर्माण कार्य और वित्तीय मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

