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किडनी रोगों से बचाव ही जागरूकता

जिला संवाददाता शिवानी जैन एडवोकेट

किडनी रोगों से बचाव ही जागरूकता

 

ऑल ह्यूमंस सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने कहा कि विश्व किडनी दिवस का उद्देश्य स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति जागरूकता पैदा करना है। आज बदलते लाइफस्‍टाइल के साथ किडनी रोगियों की संख्‍या बढ़ी है। इसके लिए मधुमेह और उच्‍च रक्‍तचाप भी जिम्‍मेदार है। ऐसे में इन दोनों को ही कंट्रोल में रखना जरूरी है ताकि जिंदगीभर स्‍वस्‍थ किडनी का साथ मिलता रहे।

मेदांता अस्पताल के डा. अमित कुमार बताते हैं कि किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी खामी है कि इसके शुरुआती लक्षण पता ही नहीं चलते और जब तक लक्षण सामने आते हैं, किडनी काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी होती है। किडनी की बीमारी इरिवर्सिबल है, अर्थात यदि किडनी क्षतिग्रस्त हो गई तो दोबारा पुनः पुरानी अवस्था में नहीं आ सकती।

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मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, डॉ आरके जैन, एडवोकेट ज्ञानेंद्र चौधरी, संरक्षक आलोक मित्र एडवोकेट, डॉ अमित गुप्ता, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, डॉ अनीता चौहान आदि ने कहा कि किडनी खराब होने की तीन प्रमुख कारण हैं। इसमें पहला मधुमेह, दूसरा ब्लड प्रेशर और तीसरा मोटापा। उन्होंने बताया कि मधुमेह धीमा जहर है, जो अगर नियंत्रित नहीं रहा तो धीरे-धीरे व्यक्ति के शरीर के सभी अंगों को डैमेज करना शुरू कर देता है। इसका किडनी पर असर गंभीर रूप से पड़ता है।मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले सभी रोगियों की किडनी की समय-समय पर जांच को प्रोत्साहित करें।

सुरक्षात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करें।

शिवानी जैन एडवोकेट डिस्ट्रिक्ट वूमेन चीफ

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