अम्बेडकरनगर
अम्बेडकरनगर के टांडा शिक्षा क्षेत्र वाले मास्टर साहब राम श्याम पटेल को लगता था कि सरकारी नौकरी तो सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के लिए है, असली कमाई तो 'नौकरी लगवाने का ठेका' लेकर होगी। फूलपुर दयालपुर के इस इंचार्ज प्रधानाध्यापक का ऐसा सिक्का चला कि स्कूल में 25 बच्चे बिना टीचर के ताला खोलकर खुद ही पढ़ाई का इतंजाम कर रहे थे और मास्टर साहब गायब थे।
आईजीआरएस पर पोल खुली तो खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच बिठा दी। जांच में पता चला कि मास्टर साहब रजिस्टर पर साइन मारकर गायब होने के पुराने खिलाड़ी हैं।
बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी; वाराणसी से लेकर लखीमपुर खीरी तक के लोग नौकरी के नाम पर अपनी जमा-पूंजी इन तक पहुंचा चुके थे। जब दबाव बढ़ा तो मास्टर साहब ने जमीन-विमीन का बहाना बनाकर ढाई-ढाई लाख के दो चेक थमा दिए—और जैसे ही बैंक में डाले गए, दोनों चेक बाउंस होकर हवा हो गए।
विभाग के नोटिसों का जवाब देना तो मास्टर साहब की शान के खिलाफ था, पर बीएसए का हंटर ऐसा चला कि पांचों उंगलियां घी में होने के बजाय अब निलंबन की तलवार लटक गई है। फिलहाल मास्टर साहब को त्रिलोकपुर स्कूल से संबद्ध कर दिया गया है, जहां बैठकर वह आराम से अपने बाउंस हुए चेकों की फ्रेमिंग करवा सकते हैं!
