“शेर का शिकार किए बिना जो न पिए पानी, नाम था उसका दुर्गावती रानी” — अनीता ठाकुर
आलीराजपुर। जनजाति विकास मंच, आलीराजपुर द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती के उपलक्ष्य में समाधि स्थल परिसर में जनजाति मातृशक्ति सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में जिलेभर से बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने सहभागिता की। इस अवसर पर वक्ताओं ने रानी दुर्गावती के शौर्य, साहस और बलिदान का स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने तथा अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का आह्वान किया।
सम्मेलन की मुख्य वक्ता इंदौर से आईं अनीता ठाकुर ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का जीवन मातृशक्ति और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके साहस और युद्धकौशल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती बचपन से ही घुड़सवारी, तलवारबाजी और तीरंदाजी जैसी कलाओं में रुचि रखती थीं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और स्वाभिमान के साथ अपने राज्य एवं प्रजा की रक्षा की।
अपने संबोधन में अनीता ठाकुर ने “शेर का शिकार किए बिना जो न पिए पानी, नाम था उसका दुर्गावती रानी” पंक्तियाँ सुनाकर मातृशक्ति में साहस, आत्मविश्वास और जागरूकता का भाव जगाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार में बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और साहसी बनाने के लिए अनुकूल वातावरण देना आवश्यक है।
उन्होंने रोजगार अथवा अन्य प्रलोभनों के माध्यम से धर्मांतरण कराने के प्रयासों से सतर्क रहने का आह्वान किया। साथ ही घरेलू कामकाज और मजदूरी के दौरान महिलाओं के शोषण की आशंका को लेकर जागरूक रहने की बात कही। उन्होंने परिवार से दूर रहकर काम करने वाली बहन-बेटियों से नियमित संवाद बनाए रखने तथा उनकी सुरक्षा और परिस्थितियों की जानकारी लेते रहने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सांसद अनीता नागर सिंह चौहान ने बच्चों और परिवारों में मोबाइल के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग पारिवारिक संवाद को प्रभावित कर रहा है और बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा रीति-रिवाजों से दूर कर सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताने और मोबाइल के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है।
उन्होंने माताओं और बहनों से संवाद करते हुए कहा कि परिवार और समाज को सही दिशा देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे सम्मेलन सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम हैं। उन्होंने धर्मांतरण के लिए दिए जाने वाले प्रलोभनों तथा समाज को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से सतर्क रहने की बात भी कही।
मंचासीन विशेष अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष हजरी खरत, जनजाति विकास मंच की महिला प्रमुख राधा सस्तीया एवं भूरीबाई गाडरिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने महिलाओं से अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर परिवार तथा समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर समूहों के माध्यम से सामाजिक कार्यों में सक्रिय समाजसेवी भूरीबाई गाडरिया तथा महुआ हेरिटेज के संचालक अंकित भाभर का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में गोविंद भयडिया पुर्णकालीन, राजेश डुडवे जिलाध्यक्ष, सीमा निगवाल, दीपिका कनेश, रेशमा भिंडे, दीपिका चौहान, संगीता मेहडा, अंगिता भयडिया, रेलम डुडवे, पायल चौहान, गीता जमरा, केशर दीदी, संगीता डुडवे, भागवंती दीदी, रेखा दूरसिंह, वीना डावर, नरेश सोलंकी, विरेन्द्र खरत, मनोज जुकटिया, रोनक पटेल व रमेश अवास्या सहित अन्य कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम का संचालन मोनिका डावर ने किया तथा आभार राधा सस्तीया ने व्यक्त किया।
