अखंड भारत न्यूज रिपोर्टर होशियार सिंह – कोसली, रेवाड़ी। कोसली में कुलदेवी माता मंदिर का नाम दोबारा बोर्ड पर भिमेश्र्वरी लिखने को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सरपंच रामकिशन जांगड़ा द्वारा मंदिर पर दोबारा ‘भिमेश्वरी’ नाम का बोर्ड लगाए जाने से कोसलिया गौत्र के श्रद्धालुओं में भारी रोष बताया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस कदम से कुलदेवी माता कोसली और कुलगुरु बाबा मुक्तेश्वरपुरी महाराज के प्रति श्रद्धालुओं की प्राचीन आस्था को ठेस पहुंची है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नवरात्रों के दौरान मेले में मठ कमेटी/ट्रस्ट के सदस्यों से कथित तौर पर मनमाने ढंग से देवी माता मंदिर के नाम की रसीद बुक से रसीदें कटवाई गईं। उन्होंने चढ़ावे की राशि के हिसाब-किताब और खर्च की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मठ कमेटी/ट्रस्ट के पूर्व अकाउंटेंट नरेंद्र सिंह ने पैसे की गिनती के दौरान बनाई गई एक वीडियो में कथित तौर पर कहा कि एसडीएम को मठ का प्रशासक नियुक्त किए जाने के बावजूद व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं आया और पुराने सदस्य पहले की तरह अपनी मर्जी से खर्च कर रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने सरपंच और मठ के प्रशासक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और चढ़ावे के हिसाब-किताब की पारदर्शी व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि गांव के गणमान्य व्यक्तियों, लंबरदारों और मौजूदा पंचायत के पंचों को गिनती के नहीं बुलाया गया सभी सरपंच के चहेते चार-पांच व्यक्ति थे की ग्रामसभा बुलाकर सहमति नहीं ली गई, जबकि इस संबंध में एसडीएम साहब कोसली को कई बार लिखित शिकायतें और प्रमाण दिए जा चुके हैं।
अब श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर के नाम से जुड़े विवाद का समाधान पारंपरिक आस्था और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाए तथा मठ की आय-व्यय व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। मामले में संबंधित अधिकारियों और सरपंच का पक्ष सामने आने पर खबर को उसमें शामिल किया जाना चाहिए।
