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पांढुरना जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग तेज, किसान संघ और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

संवाददाता निलेश कलसकर अखंड भारत न्यूज़ पांढुरना पांढुरना। इस वर्ष कम बारिश के कारण पांढुरना जिले में किसानों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। खरीफ की फसलें खराब हो गई हैं, संतरे के…

पांढुरना जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग तेज, किसान संघ और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
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संवाददाता निलेश कलसकर अखंड भारत न्यूज़ पांढुरना
पांढुरना। इस वर्ष कम बारिश के कारण पांढुरना जिले में किसानों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। खरीफ की फसलें खराब हो गई हैं, संतरे के बाग सूखने लगे हैं और आने वाले समय में पीने के पानी की समस्या भी हो सकती है। इसी को लेकर भारतीय किसान संघ और जिला कांग्रेस कमेटी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।

जिला कांग्रेस कमेटी पांढुरना ने 3 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री के पांढुरना आगमन पर उनसे मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष जतन उईके, सौंसर विधायक विजय चौरे, पांढुरना विधायक नीलेश उईके, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष विलास धोटे, बड़चिचोली ब्लॉक अध्यक्ष श्रीकांत महाजन, नगर कांग्रेस अध्यक्ष जयंत घोड़े और सोशल मीडिया जिला अध्यक्ष देवकांत मांडोगड शामिल थे।

कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कहा कि इस साल बहुत कम बारिश होने से सोयाबीन, कपास, मक्का, तुअर आदि खरीफ फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। किसान कर्ज में डूब गया है। पीने के पानी और पशुओं के चारे की भी गंभीर समस्या पैदा हो गई है।

कांग्रेस की मांग है कि पांढुरना जिले को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित किया जाए, फसलों के नुकसान का सर्वे यानी गिरदावरी कराई जाए, प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा, फसल बीमा राशि और राहत राशि दी जाए, और किसानों का कृषि ऋण माफ या स्थगित किया जाए। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन इस विषय को गंभीरता से लेकर जल्द उचित कार्रवाई करेगा।

वहीं भारतीय किसान संघ, महाकौशल प्रांत, जिला पांढुरना ने 4 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में जिलाध्यक्ष राजकुमार जायसवाल और जिला मंत्री नीरज दुबे के साथ रवि हिबरे, देवीदास राऊत, प्रदीप खवसे, रविशंकर गोरे के हस्ताक्षर हैं।

किसान संघ ने ज्ञापन में कहा है कि इस साल जिले में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। किसानों ने कपास, सोयाबीन, मूंगफली, तुअर, धान, मक्का के साथ भिंडी, टमाटर, बैंगन, मिर्च जैसी सब्जियों की बुवाई की थी। बारिश न होने से फसलों में बढ़वार और फलन नहीं हुआ और सभी फसलें खेत में ही सूख रही हैं। इससे किसान आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत चिंतित हैं।

संघ ने कहा कि पांढुरना संतरा नगरी के नाम से जाना जाता है। पानी की कमी से हजारों हेक्टेयर में लगे संतरे के पेड़ सूखने की कगार पर हैं। अगर अभी पानी नहीं मिला तो पेड़ सूख जाएंगे, जिससे किसानों को आने वाले कई सालों तक भारी नुकसान होगा।

पानी की स्थिति पर संघ ने कहा कि जिले में सिंचाई का मुख्य स्रोत कुएं हैं। कम बारिश के कारण सभी कुएं सूखने की कगार पर हैं। नदियां बह नहीं रही हैं और जिले के सभी बांध खाली पड़े हैं। ऐसी स्थिति में रबी की फसल होना मुश्किल है और आने वाले 2 से 3 महीनों में लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी की बहुत बड़ी समस्या हो सकती है।

किसान संघ ने पांच मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि पांढुरना जिले को तुरंत सूखाग्रस्त जिला घोषित किया जाए। दूसरी मांग है कि पटवारी से हर गांव में फसल नुकसान का सर्वे कराकर फसल बीमा और मुआवजा राशि जल्द दी जाए। तीसरी मांग है कि संतरा बागवानों के लिए विशेष पैकेज दिया जाए। चौथी मांग है कि पीने के पानी और रबी फसल के लिए तुरंत जल प्रबंधन योजना लागू की जाए। पांचवीं मांग है कि मुली जलाशय के पूरे डूब क्षेत्र को गाइडलाइन के अनुसार मुआवजा दिया जाए।

अपने पांढुरना दौरे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांढुरना प्रदेश का 55वां जिला है। 2023 में जिले की घोषणा के बाद से विकास के लिए लगातार पर्याप्त धनराशि दी जा रही है। जिला कार्यालय से लेकर सभी पदों की मंजूरी भी दी जा रही है।

बारिश के बारे में उन्होंने कहा कि जहां सामान्य से कम बारिश हुई है, वहां उन्होंने कलेक्टर और कमिश्नर से कहा है कि जो बेहतर हो सकता है, वह किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल मिलाकर जरूरत से ज्यादा अच्छी बारिश हुई है, लेकिन जिन लोगों को जरूरत है, उन्हें रोजगार से लेकर हर तरह की मदद दी जाएगी। सरकार के खजाने में कोई कमी नहीं है। सरकार पूरी सहायता करेगी। उन्होंने कलेक्टर और कमिश्नर से आकलन बनाकर देने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भविष्य में रोजगार के लिए नए कोर्स खोले जाएंगे और उद्योगों पर भी ध्यान दिया जाएगा। फूड इंडस्ट्री, फूड पार्क, दूध प्रोसेसिंग और दूध सहकारी समितियां बनाकर किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन को बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है और सरकार इसे पहले नंबर पर ले जाना चाहती है।

अब जिले के किसान शासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। किसान संघ और कांग्रेस दोनों ने सर्वे और मुआवजे की मांग की है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब कलेक्टर और कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।