नरवाई जलाने पर ₹15 हजार तक अर्थदंड का प्रावधान, कचरा परिवहन और प्रदूषण की शिकायतों पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी से उठे सवाल….
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए धार जिला प्रशासन ने खेतों में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाते हुए उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अर्थदंड का प्रावधान किया है। आदेश के तहत किसानों पर 2,500 से 15,000 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, फसल कटाई के दौरान कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) अथवा स्ट्रा रीपर का उपयोग अनिवार्य किया गया है। प्रशासन की इस सख्ती के बीच औद्योगिक कचरे के परिवहन और कथित प्रदूषण को लेकर कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। सवाल यह है कि जब किसानों पर नियमों के पालन के लिए सख्ती की जा रही है, तो कचरा परिवहन और उसके निपटान में नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर भी ऐसी ही तत्परता क्यों नहीं दिखाई देती?
*किसानों पर नियमों का डंडा, सुविधाएं और सहायता कितनी?*
प्रशासन का तर्क है कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और वायु प्रदूषण बढ़ता है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन जरूरी है, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के सामने इसके लिए आवश्यक मशीनरी, ईंधन और अतिरिक्त श्रम की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है।
ऐसे में किसानों पर जुर्माने का प्रावधान लागू करने के साथ उन्हें सस्ती मशीनरी, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत भी है। किसानों का पक्ष है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल खेती करने वालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। औद्योगिक इकाइयों और कचरा प्रबंधन से जुड़ी कंपनियों पर भी समान रूप से निगरानी रखी जानी चाहिए।
*कचरा परिवहन पर सवाल, कंपनियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?*
क्षेत्र में औद्योगिक एवं प्लास्टिक कचरे के परिवहन और निपटान को लेकर उठ रही शिकायतों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप हैं कि कचरा ले जाने वाले वाहनों से कई बार सड़क पर कचरा बिखरने और उसके अनुचित निपटान जैसी स्थितियां बनती हैं। यदि ऐसा हो रहा है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मामले में प्रमुख सवाल हैं कि कचरा परिवहन करने वाले वाहनों की नियमित जांच कौन करता है? कचरे के सुरक्षित निपटान के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस विभाग की है? यदि कोई कंपनी या ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
*पर्यावरण संरक्षण के नियम*
किसान, औद्योगिक इकाई और कचरा परिवहन करने वाले प्रत्येक पक्ष पर समान रूप से लागू होने चाहिए। किसी भी इकाई के आकार या प्रभाव के आधार पर नियमों के पालन में अंतर नहीं होना चाहिए।
*अधिकारियों से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला पक्ष*
कचरा परिवहन से जुड़े मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। मगर किसी से संपर्क नहीं होने के कारण उनका पक्ष नहीं मिल पाया।
*जनहित का सवाल: पर्यावरण संरक्षण में भेदभाव क्यों?*
स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और प्रदूषणमुक्त वातावरण प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान को रोकना जरूरी है, लेकिन इसके साथ औद्योगिक प्रदूषण और कचरे के अनुचित निपटान पर भी प्रभावी निगरानी आवश्यक है। नगर से आएदिन कई वाहन बेरोकटोक गुजरते हैं। जिन पर कोई कार्यवाही नहीं होती जो कि चिंता का विषय है।
*जनता की प्रमुख मांगें*
औद्योगिक एवं प्लास्टिक कचरे के परिवहन और निपटान की निष्पक्ष जांच हो। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कंपनियों, ठेकेदारों और वाहन संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण कर कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करें। किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए सस्ती मशीनरी, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
*सवाल सीधा*
यदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर किसान पर जुर्माना लगाया जा सकता है, तो प्रदूषण फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति, कंपनी या ठेकेदार के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? पर्यावरण संरक्षण की नीति तभी प्रभावी होगी, जब नियमों का पालन सभी से समान रूप से कराया जाएगा।
