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Alirajpurक्राइममध्य प्रदेश

जय जोहार’ बोलने पर भोपाल में हुए आदिवासी युवक के साथ अभद्रता के खिलाफ ज्ञापन दिया

आलीराजपुर जिला ब्यूरोचिफ आलीराजपुर:- ( दीपक शर्मा) भोपाल में आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ कथित अभद्रता और गाली-गलौज का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विद्यार्थियों…

जय जोहार’ बोलने पर भोपाल में हुए आदिवासी युवक के साथ अभद्रता के खिलाफ ज्ञापन दिया
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आलीराजपुर जिला ब्यूरोचिफ
आलीराजपुर:- ( दीपक शर्मा) भोपाल में आंदोलन कर रहे आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ कथित अभद्रता और गाली-गलौज का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन के रूप में ‘जोहार’ कहने पर कथित रूप से अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किए जाने के मामले में आदिवासी समाज जिला आलीराजपुर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर आलीराजपुर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित थाना प्रभारी के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की।
ज्ञापन में भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतनलाल सिंह परिहार के कथित व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए वायरल वीडियो सहित अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध के आवश्यक तत्व प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जोहार’ आदिवासी संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान का प्रतीक
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में कहा कि आदिवासी समाज में ‘जोहार’ केवल अभिवादन का शब्द नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, आपसी सम्मान और सामाजिक स्वाभिमान से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा विद्यार्थियों को उनकी जनजातीय पहचान अथवा सांस्कृतिक अभिवादन के कारण अपमानित किया गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। किसी भी नागरिक की सामाजिक या जनजातीय पहचान के आधार पर कथित अपमान की घटना को सामान्य रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। मामले में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
निलंबन के बाद अब निष्पक्ष जांच और जवाबदेही पर जोर
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 14 अक्टूबर 2026 को पुलिस उपायुक्त, जोन-2, नगरीय पुलिस भोपाल द्वारा संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की कार्रवाई की गई है। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि निलंबन के साथ ही मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच पूरी करना भी आवश्यक है।उन्होंने मांग की कि जांच में आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, जांच की प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए, ताकि पीड़ित विद्यार्थियों को न्याय मिल सके और मामले में किसी प्रकार की लापरवाही न हो
पीड़ित विद्यार्थियों को सुरक्षा और भयमुक्त माहौल देने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की कि संबंधित विद्यार्थियों को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए और उनके बयान भयमुक्त वातावरण में दर्ज किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी विद्यार्थी या नागरिक के साथ इस प्रकार की कथित घटना की पुनरावृत्ति न हो।उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन का मूल दायित्व नागरिकों की सुरक्षा करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आमजन के अधिकारों की रक्षा करना है। वर्दी की गरिमा तभी बनी रह सकती है, जब प्रत्येक नागरिक के साथ कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। कानून का पालन कराने वाले अधिकारियों से भी कानून और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है।
संविधान और कानून के दायरे में न्याय की मांग
आदिवासी समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि समाज संविधान और कानून में विश्वास रखता है। उनकी मांग किसी के विरुद्ध बिना जांच कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कदम उठाने की है।उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों के सम्मान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और जवाबदेही तय होने से आम नागरिकों का प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा।

बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता रहे उपस्थित

मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के दौरान मुकेश रावत, नितेश अलावा, विक्रम चौहान, मालसिंह तोमर, रितु लोहार, सुमसिंह रावत, भीलसिंह चौहान, भूपेंद्र रावत, सुनील सोलंकी, भूरू मंडलोई, देवीसिंह सोलंकी, संजय भूरिया, सुरेश सेमलिया, आशु भयड़िया, बबलू रावत, राहुल सस्तिया एवं गणेश किराड सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट स्वर में कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना जारी रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा और जांच में दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।