नवरात्रि में नौ दिन गरबा रास की धूम, महाअष्टमी पर निकलती है भव्य चुनरी यात्रा… मेले में झूले, दुकानें और महाआरती बनते हैं आकर्षण का केंद्र….
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। समीपस्थ सिंघाना नगर में स्थित प्राचीन मां हरसिद्धि शक्तिपीठ श्रद्धा, भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र है। विशाल पत्थरों से निर्मित इस भव्य मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महिमा क्षेत्र में विशेष पहचान रखती है। मान्यता है कि उज्जैन के बाद प्रदेश के प्राचीन धार्मिक स्थलों में सिंघाना की इस शक्तिपीठ का विशेष स्थान है। वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की विशेष चहल-पहल रहती है। इन दिनों मां के दर्शन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां के जयकारों, पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
*मां के दरबार में पूरी होती हैं मनोकामनाएं, अटूट है श्रद्धालुओं का विश्वास*
मां हरसिद्धि शक्तिपीठ क्षेत्रवासियों की अटूट आस्था का केंद्र है। श्रद्धालु मां के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा जीवन में शांति की कामना करते हैं। भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के चलते सिंघाना नगर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूरस्थ स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन कर भक्त आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
*गर्भगृह में विराजित हैं मां हरसिद्धि और मां सरस्वती*
मंदिर के गर्भगृह में मां हरसिद्धि और मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां के तीन स्वरूपों के दर्शन दिन में अलग-अलग समय पर होने की विशेष महिमा बताई जाती है। यह धार्मिक परंपरा और मान्यता शक्तिपीठ को श्रद्धालुओं के बीच विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। भक्त यहां पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और मां से सुख, शांति, समृद्धि तथा परिवार की मंगलकामना करते हैं।
*पांडवों के अज्ञातवास से भी जुड़ी है धार्मिक मान्यता*
मां हरसिद्धि शक्तिपीठ को लेकर अनेक प्राचीन धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी मां के दरबार में ठहरकर उपासना की थी। श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित कथाओं के अनुसार, पांडवों ने यहां से लगभग सात किलोमीटर दूर नर्मदा जल से माताजी का अभिषेक किया तथा जप-तप कर आराधना की थी। क्षेत्र में प्राचीन गुप्त मार्गों की मान्यताएं भी प्रचलित हैं। इसके साथ ही सिंघाना नगर को साढ़े बारह हनुमान मंदिरों और 84 बावड़ियों की प्राचीन धार्मिक विरासत से जोड़कर देखा जाता है। ये मान्यताएं नगर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को और बढ़ाती हैं।
मां हरसिद्धि की ख्याति सिंघाना नगर तक सीमित नहीं है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और मालवा अंचल सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगती हैं और मां के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है। भक्त परिवार सहित मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
*नौ दिनों तक गरबा रास की धूम, महिला-पुरुष और युवा लेते हैं भाग*
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक मां हरसिद्धि मंदिर परिसर में गरबा रास का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया जाता है। इसमें महिलाएं, पुरुष, युवा और बालक-बालिकाएं बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। पारंपरिक गरबा गीतों और भक्ति संगीत की धुनों पर श्रद्धालु देर रात तक गरबा रास करते हैं। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे प्रतिभागियों से आयोजन स्थल पर उत्सव का माहौल बन जाता है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करता है। नवरात्रि के दौरान नगर में चारों ओर भक्ति और उल्लास का वातावरण दिखाई देता है।
*महाअष्टमी पर निकलती है भव्य चुनरी यात्रा*
नवरात्रि में महाअष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व रहता है। इस अवसर पर मां के भक्तों द्वारा भव्य चुनरी यात्रा निकाली जाती है। श्रद्धालु भक्ति भाव से मां को चुनरी अर्पित करते हैं तथा परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। चुनरी यात्रा में शामिल भक्त मां के जयकारे लगाते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस दौरान पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण बन जाता है। चुनरी यात्रा नवरात्रि के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है, जिसमें श्रद्धालु उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हैं।
महाआरती और महाप्रसादी में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मां की महाआरती में नगर सहित आसपास के गांवों से श्रद्धालु शामिल होते हैं। आरती के समय दीपों की रोशनी और मां के जयकारों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। महाआरती के पश्चात महाप्रसादी का वितरण किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से भक्तों को सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करने और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
मां हरसिद्धि शक्तिपीठ पर वर्षों से नवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन होता आ रहा है। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजती हैं और बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए जाते हैं। श्रद्धालु मां के दर्शन करने के साथ मेले में खरीदारी भी करते हैं। परिवार के साथ पहुंचने वाले लोग धार्मिक आयोजन और मेले की रौनक का आनंद लेते हैं। मेले के कारण सिंघाना नगर में उत्सवी माहौल बन जाता है। यह आयोजन स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के लिए भी महत्वपूर्ण रहता है, क्योंकि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही से बाजार में चहल-पहल बढ़ती है।
*सौंदर्यीकरण और हरियाली से आकर्षक बना मंदिर परिसर*
मां हरसिद्धि शक्तिपीठ को आकर्षक और व्यवस्थित स्वरूप देने में मध्यप्रदेश शासन, नगर के जनप्रतिनिधियों तथा ग्राम पंचायत के प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मंदिर परिसर में सौंदर्यीकरण, उद्यान और हरियाली से इसकी सुंदरता में वृद्धि हुई है। श्रद्धालुओं के लिए आकर्षक वातावरण उपलब्ध होने से मंदिर परिसर विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, नियमित पूजा-अर्चना, नवरात्रि के गरबा रास, चुनरी यात्रा, महाआरती, महाप्रसादी और मेले की परंपरा के कारण मां हरसिद्धि शक्तिपीठ सिंघाना की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। नवरात्रि में यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ मां के प्रति लोगों की गहरी आस्था और क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती है।
