संवाददाता निलेश कलसकर अखंड भारत न्यूज़ पांढुर्णा
पांढुर्णा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिराठा में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र गोनाड़े के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाण-पत्र से जुड़ी शिकायत की जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद अब मामला केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। जांच रिपोर्ट में आय और संपत्ति से संबंधित तथ्यों का उल्लेख सामने आने के बाद प्रशासन की प्रमाण-पत्र सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करते समय परिवार की वार्षिक आय 7 लाख 2 हजार रुपए दर्शाई गई थी। वहीं नगरपालिका एवं राजस्व अभिलेखों की जांच में डॉ. गोनाड़े तथा उनके माता-पिता के नाम आवासीय, व्यावसायिक एवं कृषि संपत्तियों का उल्लेख सामने आया। रिपोर्ट में पांढरी वार्ड में लगभग 800 वर्गफीट का आवासीय भवन, ब्रह्मणी में आवासीय भूमि तथा देवखापा में उनकी माता के नाम 0.483 हेक्टेयर कृषि भूमि का उल्लेख किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र 31 जनवरी 2023 को जारी हुआ था और उसकी वैधता वर्ष 2022-23 तक थी। जांच रिपोर्ट में प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के दौरान आय एवं संपत्ति से संबंधित तथ्यों को आवेदन, शपथ-पत्र अथवा जांच के दौरान पूरी तरह प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात कही गई है। मामले में प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारी एवं संबंधित पटवारी के विरुद्ध अलग से अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने का भी उल्लेख है।
कलेक्टर पांढुर्णा नीरज कुमार वशिष्ठ ने जांच रिपोर्ट को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए कलेक्टर छिंदवाड़ा हरेंद्र नारायण को भेजा है।
अब सवाल सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं
मामले में कार्रवाई होना अपनी जगह जरूरी है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या पांढुर्णा जिले में ईडब्ल्यूएस या अन्य आर्थिक आधार पर जारी प्रमाण-पत्रों की जांच केवल शिकायत मिलने पर ही होगी?
यदि एक मामले में आय और संपत्ति के बीच अंतर की जांच सामने आ सकती है, तो यह भी देखना जरूरी हो जाता है कि क्या जिले के अन्य सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों अथवा डॉक्टरों ने भी इसी तरह के आर्थिक प्रमाण-पत्रों का लाभ लिया है?
पांढुर्णा जिले के शासकीय अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डॉक्टरों और अन्य पात्र लाभार्थियों द्वारा पूर्व में लिए गए ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्रों का क्या कभी व्यापक स्तर पर सत्यापन हुआ है?
प्रशासन करे तो व्यापक जांच
जानकारों के अनुसार, किसी एक शिकायत के आधार पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासन यदि चाहे तो जिले में जारी ऐसे प्रमाण-पत्रों की रैंडम अथवा चरणबद्ध जांच कर सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित प्रमाण-पत्र जारी करते समय आय, परिवार की संपत्ति, कृषि भूमि, आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों की जानकारी का सही तरीके से सत्यापन किया गया था या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कहीं कमी रही है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल प्रमाण-पत्र लेने वाले व्यक्ति की है या प्रमाण-पत्र जारी करने वाली पूरी व्यवस्था की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए?
प्रशासन के सामने ये सवाल
– क्या पांढुर्णा जिले में पिछले वर्षों में जारी किए गए ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्रों की व्यापक जांच होगी?
– क्या शासकीय अस्पतालों में पदस्थ अन्य डॉक्टरों के ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्रों का भी सत्यापन किया जाएगा?
– क्या आय के साथ आवेदक और उसके परिवार की अचल संपत्तियों का रिकॉर्ड नियमित रूप से मिलान किया जाता है?
– यदि किसी प्रमाण-पत्र में गलत जानकारी पाई जाती है तो उसका लाभ लेने वाले व्यक्ति के साथ प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारी और जांच प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की जिम्मेदारी कैसे तय होगी?
– क्या प्रशासन इस मामले को एक अलग घटना मानकर कार्रवाई करेगा या इसे प्रमाण-पत्र सत्यापन व्यवस्था की समीक्षा का आधार बनाएगा?
एक मामले में सामने आई अनियमितता पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी अपात्र व्यक्ति को सरकारी व्यवस्था के माध्यम से पात्रता का लाभ न मिल सके। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन की जांच की सीमा केवल एक मामले तक रहती है या पांढुर्णा जिले में ऐसे प्रमाण-पत्रों के व्यापक सत्यापन की पहल भी होती है।
