दिन में 4 से 6 घंटे और रात में 2 से 4 घंटे मिल रही बिजली, सिंचाई और मोटर चोरी की समस्या ने बढ़ाई परेशानी…
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597
मनावर। जिला धार।। अंचल में इस वर्ष अल्प वर्षा के चलते नदी, तालाब, कुएं, बावड़ी और डेम में पिछले वर्षों की तुलना में पानी कम है। इसका असर अब खेती-किसानी पर दिखाई देने लगा है। एक ओर किसान कपास, मिर्ची, मक्का सहित अन्य फसलों में सिंचाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोयाबीन की कटाई का दौर जारी है। कई किसान सोयाबीन और मक्का की कटाई पूरी कर अगली फसल की तैयारी में जुट गए हैं। खेतों में हलाई और जुताई का काम शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त पानी की उपलब्धता को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
क्षेत्र में आगामी रबी सीजन के दौरान गेहूं, चना और मक्का प्रमुख फसलें हैं। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उपलब्ध पानी के आधार पर कौन-सी फसल बोई जाए और उसकी सिंचाई की व्यवस्था कैसे की जाए। किसानों का कहना है कि यदि अभी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी और बिजली नहीं मिल रही है, तो आने वाले दिनों में रबी फसलों को पानी देना और भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे हालात में कृषि विभाग को क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसानों को फसल चयन, बोवनी और सिंचाई के संबंध में उचित मार्गदर्शन देना चाहिए।
*बिजली की अनियमित आपूर्ति से सिंचाई प्रभावित*
किसानों के अनुसार, इन दिनों खेतों में सिंचाई के लिए दिन में मात्र 4 से 6 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि रात में 2 से 4 घंटे तक अनियमित विद्युत आपूर्ति हो रही है। बिजली की सीमित उपलब्धता के कारण किसान समय पर खेतों में पानी नहीं दे पा रहे हैं। जब मौजूदा फसलों की सिंचाई में परेशानी आ रही है, तो आगामी गेहूं, चना और मक्का की फसलों के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था कैसे होगी, यह किसानों के सामने बड़ा सवाल है। किसानों का यह भी कहना है कि कई स्थानों पर विद्युत विभाग द्वारा खेतों की बिजली काट दी गई है, जबकि कुछ जगहों पर ट्रांसफार्मर तक हटा दिए गए हैं। हालांकि, इन मामलों में विभागीय स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। किसानों को नियमित और पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है तथा अगली फसल की तैयारी को लेकर असमंजस बना हुआ है।
*मोटर चोरी के डर से रोज घर ले जाना पड़ रही*
अल्प वर्षा के कारण जलस्रोतों में पानी कम होने के बीच सिंचाई के लिए उपलब्ध मोटरों की सुरक्षा भी किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। किसानों के अनुसार, नदी, कुएं और बावड़ियों के आसपास मोटर चोरी की घटनाओं का डर बना रहता है। इसके चलते कई किसान रात में खेत पर मोटर छोड़ने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं।
किसान दिनभर खेतों में सिंचाई करने के बाद रात में भारी मोटर निकालकर घर ले जाते हैं और अगले दिन फिर उसे खेत पर ले जाकर लगाते हैं। इससे उनके काम का बोझ बढ़ गया है। भारी-भरकम मोटर को रोजाना लाना-ले जाना न केवल मुश्किल है, बल्कि जोखिम भरा भी है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की व्यवस्था करने के साथ अब मोटर की सुरक्षा की चिंता भी करनी पड़ रही है।
*महंगी खेती, कम आमदनी की चिंता*
किसानों के सामने पानी और बिजली की समस्या के साथ खेती की बढ़ती लागत भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री महंगी होने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि कई बार उपज से होने वाली आमदनी की तुलना में खेती पर खर्च अधिक हो जाता है। ऐसे में पानी की कमी और सिंचाई संबंधी परेशानियां उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
*कृषि और विद्युत विभाग से मार्गदर्शन की मांग*
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए किसानों ने कृषि विभाग, विद्युत विभाग तथा शासन-प्रशासन से आगामी फसलों के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। किसानों को बताया जाए कि कम पानी की स्थिति में कौन-सी फसल लेना अधिक उपयुक्त रहेगा, उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग कैसे किया जाए और सिंचाई की जरूरत को देखते हुए फसल चयन किस प्रकार किया जाए। इसके साथ ही किसानों को बिजली आपूर्ति की स्थिति स्पष्ट करने, खेतों में सिंचाई के लिए आवश्यक विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा मोटर चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। समय रहते उचित सलाह और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो अल्प वर्षा का असर आगामी रबी सीजन की बोवनी, सिंचाई और उत्पादन पर पड़ सकता है।
