गोण्डा। जिले में पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाओं में लगातार वृद्धि पर उपजा यू पी जर्नलिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कड़ा आक्रोश जताया है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जी.सी. श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारों के उत्पीड़न पर तत्काल प्रभावी रोक नहीं लगी तो प्रदेशभर के पत्रकार शासन-प्रशासन के विरुद्ध लोकतांत्रिक ढंग से धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि गोण्डा में बीते एक माह के दौरान करीब आधा दर्जन पत्रकारों के कथित उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं। इन मामलों का विभिन्न पत्रकार संगठनों ने पुरजोर विरोध भी किया, इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पत्रकारों के विरुद्ध बिना समुचित जांच-पड़ताल के कार्रवाई की जा रही है, जिससे पत्रकारों में आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष प्रदीप तिवारी के विरुद्ध दर्ज मुकदमे का उल्लेख करते हुए डॉ.
श्रीवास्तव ने कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही कोई कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने मुकदमे को तत्काल निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि यदि पत्रकार के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं ली गई तो उपजा प्रदेश स्तर पर आंदोलन का निर्णय लेने को विवश होगी।
डा. श्रीवास्तव ने पत्रकार सत्यम मिश्रा पर हुए हमले तथा पत्रकार अतुल तिवारी से जुड़े कथित पुलिस उत्पीड़न का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, ऐसे में उन्हें भय या दबाव के वातावरण में काम करने के लिए विवश करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि किसी पत्रकार के विरुद्ध रसूख अथवा दबाव के चलते बिना निष्पक्ष जांच के मुकदमा दर्ज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उपजा यू पी जर्नलिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन पत्रकारों के उत्पीड़न के प्रत्येक मामले में संबंधित अधिकारियों के समक्ष मजबूती से अपनी आवाज उठाएगा। श्रीवास्तव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदीप तिवारी के विरुद्ध दर्ज मुकदमा समाप्त करने और पत्रकारों के उत्पीड़न पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार संगठन संयुक्त रूप से शासन-प्रशासन के समक्ष लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
