पेयजल पाइपलाइन फूटी, सड़कों पर बिखरी केबल से ग्रामीण परेशान; MD ने जताया आश्चर्य, जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा….
रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977587
मनावर। जिला धार।। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पुनरुत्थान वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत ग्राम गुलाटी में बिजली वितरण व्यवस्था सुधारने और स्ट्रीट लाइट लगाने का काम सात माह बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अप्रैल 2026 में शुरू हुए इस कार्य में कथित लापरवाही और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कहीं बिजली केबल सड़कों पर बिखरी पड़ी है, तो कहीं मकानों के सामने गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं। वहीं, 25 फीट लंबे लोहे के पोल महज एक फीट गहरे गड्ढों में लगाए जाने से उनकी मजबूती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को हादसों का डर सता रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
*एक फीट गहरे गड्ढे में खड़े किए 25 फीट के पोल, गुणवत्ता पर सवाल*
ग्रामीणों के अनुसार, बिजली संबंधी तकनीकी कार्य के लिए नियुक्त ठेकेदार की विशेषज्ञता पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि ठेकेदार का मुख्य व्यवसाय सिलाई का है और उसे बिजली के तकनीकी कार्यों का पर्याप्त अनुभव नहीं है। हालांकि, ठेकेदार की योग्यता और कार्य की गुणवत्ता की आधिकारिक जांच होना बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। करीब 25 फीट लंबे लोहे के चैनल पोल के लिए महज एक फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें सीमेंट भरकर पोल खड़े कर दिए गए। यदि यह स्थिति तकनीकी जांच में सही पाई जाती है, तो आंधी-तूफान के दौरान पोल गिरने और जनहानि होने का खतरा बना रह सकता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पोल की नींव, मजबूती और स्थापना के निर्धारित मानकों की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि किसी दुर्घटना से पहले कमियों को दूर किया जा सके।
*सड़कों पर पड़ी केबल, कई मकानों के दरवाजों पर अब भी लटक रही*
बिजली लाइन बिछाने के काम में देरी का असर भी गांव में दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई जगह केबल लंबे समय तक सड़कों पर पड़ी रही। वाहनों की आवाजाही के कारण केबल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी बनी रही। स्थानीय स्तर पर समाचार प्रकाशित होने और फोटो-वीडियो के माध्यम से मामला सामने आने के बाद कुछ स्थानों पर केबल पोल पर चढ़ाई गई, लेकिन कई जगह अब भी केबल लोगों के घरों के मुख्य दरवाजों के सामने पड़ी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू की गई योजना का काम ही यदि लोगों की परेशानी का कारण बन जाए, तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। सात माह में एक छोटे से गांव में काम पूरा नहीं हो पाना कार्य की गति और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
*बिजली पोल के गड्ढे से फूटी पेयजल पाइपलाइन, दूषित पानी पहुंचने का आरोप*
निर्माण कार्य के दौरान हुई लापरवाही का एक गंभीर मामला ग्रामीण कैलास सनपड़ा के मकान के सामने सामने आया। उनके अनुसार, बिजली पोल लगाने के लिए खोदे गए गड्ढे के कारण गांव की मुख्य पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। उनका आरोप है कि पाइपलाइन में गंदा और बदबूदार पानी मिलने से कई दिनों तक ग्रामीणों को दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने बताया, "बिजली पोल लगाने के लिए एक स्थानीय रहवासी मकान के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसी दौरान गांव की मुख्य पेयजल पाइपलाइन फूट गई। कई दिनों तक गटर का बदबूदार पानी पेयजल पाइपलाइन में मिलता रहा। ग्रामीणों ने सरपंच और जिला जनपद प्रतिनिधि से भी शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बाद में नल सप्लायर ने निजी स्तर पर लीकेज ठीक किया, लेकिन गड्ढा आज भी खुला पड़ा है।"
उन्होंने कहा कि यदि विभाग को काम पूरा करना है तो तत्काल पूरा करे, अन्यथा पोल हटाकर गड्ढे को भरवाया जाए और जमीन समतल की जाए। खुले गड्ढे से रोजाना लोगों को परेशानी हो रही है और दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
*जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल, ग्रामीणों ने मांगी जवाबदेही*
गांव में लंबे समय से चल रहे अधूरे कार्य को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और संबंधित जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि समस्या सामने होने के बावजूद अब तक प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से भी मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग, कार्य एजेंसी और स्थानीय स्तर पर निगरानी करने वाले जिम्मेदारों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सात माह बाद भी काम अधूरा क्यों है। साथ ही, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और पोल लगाने के तरीके की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं।
*MD ने जताया आश्चर्य, जांच कर कार्रवाई का दिया भरोसा*
मामले को लेकर जब विद्युत विभाग के प्रबंध निदेशक (MD) कलम टडवाढ से चर्चा की गई, तो उन्होंने काम अधूरा होने की जानकारी पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "क्या अभी तक यह कार्य पूर्ण नहीं हुआ है? मैं इस पूरे मामले को तुरंत दिखवाता हूं और स्थिति का जायजा लेता हूं।"
प्रबंध निदेशक के आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी और अधूरे काम को जल्द पूरा कराया जाएगा।
*ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें*
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर निम्न कार्रवाई करने की मांग की है—
*तकनीकी जांच*: RDSS योजना के तहत हुए निर्माण कार्य, पोल की नींव और इस्तेमाल की गई सामग्री की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।
खुले गड्ढों से राहत: पोल निर्धारित मानकों के अनुरूप मजबूती से लगाए जाएं। जहां काम पूरा नहीं होना है, वहां पोल हटाकर गड्ढे भरवाए जाएं और जमीन समतल की जाए। सड़कों और मकानों के सामने पड़ी केबल भी व्यवस्थित की जाए।
जिम्मेदारी तय हो: जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि MD के आश्वासन के बाद गुलाटी में अधूरे कार्य को पूरा कराने और निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए विभाग कब ठोस कदम उठाता है। ग्रामीणों की मांग है कि किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय खुले गड्ढों और कमजोर पोल से पैदा हो रहे संभावित खतरे को प्राथमिकता से दूर किया जाए।
